छत्तीसगढ़

बस स्टैंड स्थित सीआरपीएफ कैंप में शहीद आरक्षक को दी गई श्रद्धांजलि, लोकतंत्र के महापर्व में सुरक्षा के लिए दिया योगदान

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के आरक्षक देवेंद्र कुमार की शहादत युबीजीएल सेल के ब्लास्ट होने से हो गयी

AINS NEWS कोंडागांव……  बस्तर लोकसभा क्षेत्र का चुनाव 19 अप्रैल 2024 को संपन्न हुआ जिसमें सुरक्षा के लिए तैनात केंद्रीय सुरक्षा बल द्वारा वामपंथी उग्रवाद प्रभावित बीजापुर जिले में बस्तर विधानसभा क्षेत्र के धोबीगुड़ा निवासी देवेंद्र सेठिया को तैनात किया गया था जिनकी लोकसभा चुनाव डियुटी के दौरान युबीजीएल फटने से मौत हो गई, उनके पार्थिव शरीर को जनप्रतिनिधियों ने श्रद्धांजलि अर्पित किया।
बस्तर में चल रहे चुनाव के दौरान एक हादसे में जवान शहीद हो गया है ,केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के आरक्षक देवेंद्र कुमार की शहादत युबीजीएल सेल के ब्लास्ट होने से हो गयी। गलगम की घटनास्थल के निरीक्षण/जांच हेतु एक्सपर्ट की टीम रवाना किया गया है, जिससे विस्फोट के कारणों से संबंधित जानकारी प्राप्त किया जा सके।
प्राप्त जानकारी अनुसार बीजापुर जिले के उसूर में चुनाव के दौरान ड्यूटी कर रहे जवान की युबीजीएल की सेल अचानक फट जाने से जवान घायल हो गया था, घायल जवान का प्राथमिक उपचार उसूर स्वास्थ्य केंद्र में कराया गया इसके बाद उसे बेहतर उपचार के लिए जगदलपुर के मेडिकल कॉलेज लाया गया जहां ईलाज के दौरान जवान शहीद हो गया ।शहीद जवान को 20अप्रैल को नए बस स्टैंड में सीआरपीएफ 80 बटालियन में बड़े अधिकारी सहित बस्तर आईजी ने श्रद्धांजलि अर्पित की। शहिद जवान को गॉड आफ ऑनर भी दिया गया इसके बाद शहीद जवान को ससम्मान उसके गृह ग्राम जगदलपुर सीमा क्षेत्र बकावंड ब्लाक के धोबीगुड़ा भेजा गया जिसके बाद शहीद जवान के शव को ग्राम पहुंचाया तो पूरे गांव की जनता रो पड़ी।
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विधायकों ने दी सीआरपीएफ कैंप में श्रध्दांजली
शहीद बस्तर विधानसभा क्षेत्र का रहने वाला था जिसकी मौत की जानकारी आने के बाद कांग्रेस पार्टी के बस्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक लखेश्वर बघेल व जगदलपुर विधायक किरण देव सुबह सीआरपीएफ हैंडक्वाटर बस स्टैंड पहुंचे। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल व छत्तीसगढ़ पुलिस बल के शीर्ष अधिकारी व जवानों की उपस्थिति में गार्ड आफ आनर दिया गया।
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देवेन्द्र की शहादत पर आसमान भी रोया
जगदलपुर शहर सीमा से सटे धोबीगुड़ा में देवेन्द्र सेठिया की मौत पर पूरा क्षेत्र गमगीन था तो उनके चीता में आग दिए जाने पर आसमान भी फट कर रोया। देवेन्द्र के घर में सुबह से ही नाते रिश्तेदारों की भीड़ थी जिसको सभी अंतिम विदाई देने आतूर थे। देवेन्द्र सेठिया के पिता मजदूर थे और उनकी मौत के बाद देवेन्द्र के उपर ही घर का दारोमदार था। देवेन्द्र की दो बड़ी बहनें हैं तो एक छोटा भाई है और चीता को उसने ही आग दी।

 

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