“Training for Child Welfare Police Officers On the JJ Act and POCSO Act”, एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन
देखरेख और संरक्षण की अवशकता वाले बच्चे कौन कौन हो सकते है यह बताया गया

AINS NEWS…. पुलिस महानिदेशक महोदय, छ.ग के निर्देशानुसार “Training for Child Welfare Police Officers On the JJ Act and POCSO Act” के सम्बंद में नया सर्किट हाउस, सिविल लाइन्स रायपुर में एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया गया। जिसमे श्री अमरेश मिश्रा पुलिस महानिरीक्षक रायपुर क्षेत्र रायपुर के मार्ग दर्शन एवं श्रीमती मिलना कुर्रे, पुलिस उप महा निरीक्षक, पु.मु. नवा रायपुर, डॉक्टर संतोष कुमार सिंह वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मेघा टेम्बुलकर, एआईजी, पु.मु. नवा रायपुर, श्री कीर्तन राठौर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण, रायपुर की उपस्तिथि में श्रीमती ममता देवांगन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक IUCAW रायपुर, सुश्री ललिता मेहर उप पुलिस अधीक्षक IUCAW रायपुर के नेतृत्व में छ.ग. पुलिस जिसमे रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव के जिले में पदस्थ विशेष किशोर पुलिस इकाई एवं थाना में पदस्थ बाल पुलिस कल्याण अधिकारी को कशोर न्याय अधिनियम 2015 आदर्श अधिनियम 2016 एवं लैंगिग अपराधों से देखरेख और संरक्षण अधिनियम 2012 के प्रावधानों पर बाल कल्याण अधिकारियो के क्षमतावर्धन, बच्चो के अपराध से सबंधित सजकता, संवेंदनशीलता एवं बाल हितैषी वातावरण सुलभ बनाने हेतु प्रशिक्षण प्रदान किया गया जिसमे रायपुर, दुर्ग एवं राजनांदगाव रेंज के 13 एसजेपीयू एवं 194 बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, महिला रक्षा टीम, आईयूसीएडब्लू, रायपुर के स्टॉफ उपस्थित रहे। प्रशिक्षण कार्यक्रम में यूनिसेफ से चेतना देसाई, बाल संरक्षण विशेषज्ञ, गीतांजोली, स्टेट कंसलटेंट यूनिसेफ, कॉउंसिल टू सिक्योर जस्टिस से निमिषा श्रीवास्तव निदेशक एवं उर्वशी तिलक निदेशक रेस्टोरेटिव जस्टिस एवं पेरेक्टिस जो की प्रशिक्षक रहे


1 – बाल कल्याण पुलिस अधिकारी को जेजे नियम 8 को बताया गया कि इसके अनुसार कार्यवाही करे एवं जघन्य अपराध में ही प्राथमिकी दर्ज करे अन्य सभी अपराध में रोजनामचा /डी डी एंट्री कर बोर्ड को प्रस्तुत करें।
2 – सामान्य एवं गंभीर अपराध में प्रारूप 2 भरकर बच्चे को परिजन /अभिभावक के सुपुर्द करें।
3 – रात्रि कालीन समय में बच्चे को ना पकडे, अगर बच्चे को पकडना बच्चे के सवोत्तमहित में है तो उसे रात्रि में संप्रेक्क्षण गृह में रखे।
4 – किसी प्रकरण अज्ञात व्यक्ति के सम्बंद में प्राथमिकी दर्ज हुई है और जाँच के दौरान बच्चा पकड़ में आता है तो अपराध का स्वरुप तैयार कर बोर्ड के समक्ष जांच हेतु प्रस्तुत करना है।
5 – बच्चो के उम्र सम्बंधित जाँच हेतु कशोर न्याय अधिनियम धारा 94 के अनुसार कार्यवाही करें। उम्र सम्बंधित दस्तावेज नहीं होने की स्थिती में बोर्ड/ समिति के आदेशानुसार कार्यवाही करना है।
6 – भारतीय न्याय संहिता की धारा जो कि सामान्य या गंभीर अपराध की श्रेणी में आता हो और उसके साथ पोक्सो की धारा जिसमे 7 वर्ष से कम की सजा का प्रावधान है तो उसमे भी रोजनामचा /डी डी एंट्री कर बोर्ड को प्रस्तुत किया जाना हैं।
7 – किसी प्रकरण में पीड़िता नशा सेवन अत्यधिक मात्रा में करती है और उसके परिजन द्वारा थाना लेकर आते है तो उसे सीएनसीपी की तरह देख़ते हुए अविलंब बाल कल्याण समिति के माध्यम से एक संस्था में पुनर्वास कराये जो कि नशा मुक्ति केंद्र हो।
8 – यौन शोषण के मामलो में सुचना मिलने पर तत्काल अपराध पंजीबद्ध करें एवं पीड़िता के सर्वोत्तमहित में कार्यवाही करें।
9 – देखरेख और संरक्षण की अवशकता वाले बच्चे कौन कौन हो सकते है यह बताया गया।
10 – जिले में बच्चो से सम्बंधित कार्यरत अलग अलग स्टेक होल्डर के बारे में बताया गया की प्र्त्येक जिला में जिला बाल संरक्षण अधिकारी , बाल कल्याण समिति , किशोर न्याय बोर्ड , विशेष किशोर पुलिस इकाई जिसकी सहायता हम ले सकते है।





