बीते चार वर्षों में हेलीकॉप्टर सेवाओं पर ₹249.15 करोड़ खर्च, कांग्रेस विधायक इंद्र साव द्वारा इस मुद्दे पर सवाल उठाए
हेलीकॉप्टर सेवाओं पर किए गए खर्च की तुलना यदि अन्य राज्यों से की जाए तो यह राशि अधिक प्रतीत होती है

AINS NEWS…. छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्य सरकार के हेलीकॉप्टर किराए पर किए गए भारी-भरकम खर्च को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस विधायक इंद्र साव द्वारा इस मुद्दे पर सवाल उठाए जाने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लिखित जवाब देते हुए बताया कि वर्ष 2021-22 से जनवरी 2025 तक राज्य सरकार ने हेलीकॉप्टर सेवाओं के लिए कुल ₹249.15 करोड़ खर्च किए हैं। यह राशि गुड़गांव स्थित ढिल्लन एविएशन प्राइवेट लिमिटेड और एयर किंग चार्टर प्राइवेट लिमिटेड को दी गई है।

हेलीकॉप्टर सेवाओं पर खर्च का वार्षिक ब्योरा
मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने बीते चार वर्षों में हेलीकॉप्टर सेवाओं पर तो
– वर्ष 2021-22: ₹24.82 करोड़
– वर्ष 2022-23: ₹78.70 करोड़
– वर्ष 2023-24: ₹89.50 करोड़
– वर्ष 2024-25 (31 जनवरी तक): ₹56.11 करोड़ खर्च किए गए है…
कुल खर्च की बात करें तो यह राशी हो जाती है… 249.15 करोड़
विधानसभा में जैसे ही यह जानकारी सामने आई, विपक्षी दलों ने इसे जनता के पैसे की बर्बादी करार देते हुए सरकार को घेरा। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि राज्य सरकार ने आखिर इन हेलीकॉप्टर सेवाओं का उपयोग किस कार्य के लिए किया? विपक्ष का आरोप है कि हेलीकॉप्टर सेवाओं पर इतना अधिक खर्च सत्ता पक्ष के ऐशो-आराम और गैर-जरूरी यात्राओं में किया गया, जबकि राज्य के कई क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं है।
विपक्ष का आरोप है कि,
– यह जनता के कर के पैसों की बर्बादी है।
– सरकार को यह बताना चाहिए कि किन-किन परिस्थितियों में हेलीकॉप्टर सेवाओं का उपयोग किया गया।
– यदि ये सेवाएं प्रशासनिक कार्यों के लिए थीं, तो इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार की ओर से हेलीकॉप्टर सेवाओं का उपयोग प्रशासनिक यात्राओं, आपातकालीन परिस्थितियों और अन्य सरकारी कार्यों के लिए किया गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि……….
– हेलीकॉप्टर सेवाओं का उपयोग राज्य के दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित पहुंच के लिए किया गया।
– आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में हेलीकॉप्टर सेवाओं का अहम योगदान रहा।
– प्रशासनिक यात्राओं के लिए इन सेवाओं की आवश्यकता पड़ी ताकि शीघ्र निर्णय और क्रियान्वयन किया जा सके।
– स्वास्थ्य आपात स्थितियों में भी इन सेवाओं का प्रयोग हुआ।
इस पूरे मुद्दे के सामने आने के बाद अब सरकार की पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्या सरकार ने हेलीकॉप्टर सेवाओं का सही उपयोग किया है, या यह सिर्फ एक अनावश्यक सरकारी खर्च था?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह खर्च प्रशासनिक और आपातकालीन कार्यों में हुआ है तो सरकार को इसका विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक करना चाहिए। RTI (सूचना का अधिकार) के माध्यम से इस खर्च की जानकारी मांगी जा सकती है।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा हेलीकॉप्टर सेवाओं पर किए गए खर्च की तुलना यदि अन्य राज्यों से की जाए तो यह राशि अधिक प्रतीत होती है। उदाहरण के लिए—
– मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले तीन वर्षों में हेलीकॉप्टर सेवाओं पर ₹120 करोड़ खर्च किए।
– उत्तर प्रदेश सरकार का वार्षिक हेलीकॉप्टर खर्च ₹50-60 करोड़ के आसपास रहता है।
– महाराष्ट्र सरकार की ओर से VIP यात्राओं और आपातकालीन सेवाओं के लिए लगभग ₹80-90 करोड़ प्रति वर्ष खर्च किए जाते हैं।
इस तुलना से साफ जाहिर होता है कि छत्तीसगढ़ में हेलीकॉप्टर सेवाओं का खर्च अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है।
विपक्ष ने विधानसभा में मांग की है कि हेलीकॉप्टर सेवाओं पर हुए इस खर्च की एक उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और इसकी विस्तृत रिपोर्ट जनता के सामने रखी जाए। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर CAG (कैग) ऑडिट की भी मांग की है।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा हेलीकॉप्टर सेवाओं पर किए गए भारी-भरकम खर्च को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच तकरार जारी है। विपक्ष इसे जनता के पैसों की बर्बादी बता रहा है, वहीं सरकार इसे प्रशासनिक जरूरत का नाम दे रही है। अब देखना यह होगा कि क्या इस मुद्दे पर कोई जांच होगी या फिर यह महज एक राजनीतिक बहस बनकर रह जाएगा।




