मोस्ट वांटेड नक्सली कमांडर और 1 करोड़ का इनामी माड़वी हिड़मा एक बड़ी मुठभेड़ में मारा गया
खूनी विचारधारा पर एक आखिरी प्रहार है जिसने हजारों जानें ली हैं

AINS NEWS… आज सुबह, सुरक्षाबलों ने उस नाम को खामोश कर दिया, जो दशकों से बस्तर से लेकर आंध्र प्रदेश तक आतंक का दूसरा नाम बना हुआ था। जी हाँ, मोस्ट वांटेड नक्सली कमांडर और 1 करोड़ का इनामी माड़वी हिड़मा एक बड़ी मुठभेड़ में मारा गया है। यह सिर्फ हिड़मा की मौत नहीं है; यह उस खूनी विचारधारा पर एक आखिरी प्रहार है जिसने हजारों जानें ली हैं।

सुकमा जिले से सटे आंध्र प्रदेश के अल्लुरी सीताराम राजू जिले के मारेडुमिल्ली मंडल के घने जंगलों में सुरक्षाबलों को एक बड़ी नक्सली मीटिंग की पुख्ता सूचना मिली थी। यह सूचना किसी और की नहीं, बल्कि सीपीआई-माओवादी की केंद्रीय कमेटी के सदस्य और पीपुल्स लिब्रेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की बटालियन नंबर-1 के खूंखार कमांडर माड़वी हिड़मा के मूवमेंट की थी।
आंध्र प्रदेश की एलीट ‘ग्रेहाउंड्स’ फोर्स के जवानों ने इस इंटेलिजेंस इनपुट पर एक सटीक और सुनियोजित ऑपरेशन लॉन्च किया।
सुबह लगभग 6:30 से 7:00 बजे के बीच सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के ठिकाने को घेर लिया। जवानों ने नक्सलियों को सरेंडर करने की चेतावनी दी, लेकिन आतंक का रास्ता चुनने वालों ने गोलियों से जवाब दिया।
दोनों तरफ से भीषण फायरिंग शुरू हो गई। यह मुठभेड़ कई घंटों तक चली। लेकिन सुरक्षाबलों के अदम्य साहस और सटीक रणनीति के आगे नक्सली टिक नहीं सके।
जब गोलियां थमीं और जवानों ने इलाके की तलाशी ली, तो जो मंजर सामने आया, इस एनकाउंटर में कुल 6 बड़े नक्सली कैडर मारे गए। और इन 6 लाशों में एक वो चेहरा था, जिसकी तलाश कई राज्यों की पुलिस को दशकों से थी। यह चेहरा था माड़वी हिड़मा का।
मारे गए नक्सलियों में हिड़मा के साथ उसकी पत्नी राजे, जो खुद एक बड़ी नक्सली लीडर थी, और 25 लाख का इनामी एसजेडसीएम टेक शंकर भी शामिल है। हिड़मा पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था, हालाँकि कुछ रिपोर्ट्स यह इनाम 1 करोड़ तक बताती हैं।
अल्लुरी सीताराम जिले के एसपी अमित बरदार ने मीडिया से बात करते हुए इस ऑपरेशन की पुष्टि की है। उन्होंने बताया, “आज सुबह 6:30-7 बजे के करीब मारेडुमिल्ली मंडल के जंगल में एनकाउंटर शुरू हुआ था। अब तक 6 नक्सलियों के मारे जाने की सूचना मिली है। यह पुलिस और सुरक्षाबलों के द्वारा चलाया गया एक साझा और सफल ऑपरेशन है।”
माड़वी हिड़मा का जन्म 1981 में सुकमा जिले के पूवर्ती गांव में हुआ था। वह बस्तर के उन गिने-चुने आदिवासी नक्सलियों में से था, जो संगठन की सबसे ऊंची सीढ़ी, यानी ‘सेंट्रल कमेटी’ तक पहुंचा था। वह सेंट्रल कमेटी का सबसे युवा सदस्य भी था।
हिड़मा को देश की इकलौती माओवादी ‘बटालियन नंबर-1’ का कमांडर बनाया गया था। यह वही बटालियन है, जो सुरक्षाबलों पर सबसे बड़े, सबसे घातक और सबसे संगठित हमलों के लिए जानी जाती है।
हिड़मा का नाम पहली बार 2013 में झीरम घाटी के बर्बर नरसंहार के बाद चर्चा में आया था, जिसमें कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व समेत 27 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी।
इसके बाद हिड़मा रुका नहीं। उसने एक के बाद एक, 26 से ज्यादा बड़े नक्सली हमलों को अंजाम दिया।
2010 में दंतेवाड़ा का ताड़मेटला हमला, जिसमें 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे।
2017 का बुर्कापाल हमला, जिसमें 25 जवान शहीद हुए।
और 2021 का सुकमा-बीजापुर के टेकलगुडेम का वो भीषण हमला, जिसमें 22 जवान शहीद हो गए थे और हिड़मा ने जवानों के हथियार तक लूट लिए थे।
हिड़मा का मारा जाना सिर्फ एक एनकाउंटर नहीं है। यह बस्तर में नक्सली नेतृत्व का सफाया है। यह उस संगठन की रीढ़ की हड्डी का टूटना है, जो अब अपने आखिरी दिन गिन रहा है। यह उन सैकड़ों शहीद जवानों को सच्ची श्रद्धांजलि है, जिन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए।




