पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां पूरी, ड्राफ्ट भी तैयार
छत्तीसगढ़ में लागू होने वाला पुलिस कमिश्नर सिस्टम फिलहाल सीमित अधिकारों वाला होगा

AINS NEWS… साल 2025 की आखिरी कैबिनेट बैठक मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में होने जा रही है। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा संभावित है, लेकिन सबसे अहम मुद्दा रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने को लेकर है। इसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं और इसका ड्राफ्ट भी तैयार हो चुका है। अफसरों के बीच इस बात पर राय-मशविरा हो चुका है कि रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम किस स्वरूप में लागू किया जाएगा। हालांकि, पहले यह चर्चा थी कि 1 जनवरी 2026 से रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम प्रभावशील हो जाएगा, लेकिन अभी तक कैबिनेट से औपचारिक अनुमोदन नहीं मिला है। अधिकारियों का मानना है कि तारीख से ज्यादा जरूरी यह है कि सिस्टम को पूरी तैयारी के साथ लागू किया जाए। भले ही इसमें एक-दो सप्ताह की देरी हो, लेकिन व्यवस्था स्पष्ट और मजबूत होनी चाहिए।

वर्तमान में खड़मास का समय चल रहा है, जिसे पारंपरिक रूप से शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी है कि पुलिस जैसे संवेदनशील विभाग में बड़े बदलाव को खड़मास के बाद ही लागू किया जाए। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि 14 जनवरी (मकर संक्रांति) के बाद रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम की विधिवत शुरुआत की जा सकती है।
पुलिस कमिश्नर के लिए संभागीय आयुक्त कार्यालय को चुना गया है। यह कार्यालय नया बनकर तैयार है और संभागीय आयुक्त महादेव कावड़े वहां शिफ्ट भी हो चुके हैं। फर्नीचर और बुनियादी व्यवस्थाएं भी पूरी हैं। केवल एसपी कार्यालय से फाइलों के स्थानांतरण की प्रक्रिया शेष है। वर्तमान एसपी कार्यालय को कंपोजिट बिल्डिंग निर्माण के लिए तोड़ा जाना है, इसलिए पहले से ही पुलिस कार्यालय को वहां स्थानांतरित करने की योजना थी। अब वही कार्यालय पुलिस कमिश्नर कार्यालय के रूप में कार्य करेगा। हालांकि खड़मास के कारण फिलहाल इसका औपचारिक उद्घाटन टल सकता है।
सूत्रों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में लागू होने वाला पुलिस कमिश्नर सिस्टम फिलहाल सीमित अधिकारों वाला होगा। इसमें पुलिस कमिश्नर को न तो शस्त्र लाइसेंस, न बार लाइसेंस और न ही जिला बदर जैसे अधिकार दिए जाएंगे। यानी संरचना तो बदलेगी, लेकिन शक्तियों का वास्तविक हस्तांतरण सीमित रहेगा। अब सबकी नजरें 31 दिसंबर की कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि रायपुर को वास्तव में सशक्त पुलिस कमिश्नर सिस्टम मिलेगा या फिर केवल नाममात्र का बदलाव किया जाएगा।




