छत्तीसगढ़ के लिए साल 2025: 10 बड़ी घटनाएं जो सोचने पर किया मजबूर
2025 छत्तीसगढ़ के लिए मिश्रित भावनाओं वाला साल रहा

AINS NEWS… साल की शुरुआत ही एक दिल दहला देने वाली खबर से हुई। पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया। 1 जनवरी को लापता हुए मुकेश का शव 3 जनवरी को एक सेप्टिक टैंक से बरामद हुआ। यह केवल एक हत्या नहीं थी, बल्कि सच की आवाज को दबाने की क्रूर कोशिश थी। डिनर के बहाने बुलाकर जिस तरह लोहे की रॉड से उनकी जान ली गई, उसने पत्रकारिता जगत में भय और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया।

जहां एक तरफ साल की शुरुआत खून-खराबे से हुई, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा बलों के लिए यह साल सबसे बड़ी कामयाबी लेकर आया। दशकों से सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बना खूंखार नक्सली कमांडर हिडमा, 18 नवंबर 2025 को मारा गया। छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश बॉर्डर के मारेडमिल्ली जंगल में हुई मुठभेड़ में हिडमा का अंत हुआ। इसे बस्तर में शांति की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
यही नहीं, 17 अक्टूबर को 210 नक्सलियों ने एक साथ सरेंडर किया, जिसमें प्रवक्ता रूपेश भी शामिल था।
राजनीतिक गलियारों की बात करें तो प्रदेश के बहुचर्चित 3200 करोड़ के शराब घोटाले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को 15 जनवरी को ED ने गिरफ्तार कर लिया। 64 करोड़ की रिश्वत के आरोपों में घिरे लखमा फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे हैं।
वहीं, राजनीति में एक नया अध्याय भी जुड़ा। हरियाणा की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में पहली बार 14 मंत्री बनाए गए। 20 अगस्त को हुए कैबिनेट विस्तार ने सियासी समीकरणों को साधने की कोशिश की।
विकास और भव्यता की तस्वीर भी इस साल देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवा रायपुर में बने नए विधानसभा भवन का उद्घाटन किया। 51 एकड़ में फैला यह भवन लोकतंत्र का नया मंदिर बना।
साथ ही, नवंबर में रायपुर ने पहली बार देश के सबसे बड़े पुलिस मंथन यानी 60वें अखिल भारतीय DGP-IGP सम्मेलन की मेजबानी की, जिसमें प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और NSA अजीत डोभाल शामिल हुए।
साल गुजरते-गुजरते कुदरत और कट्टरता ने भी अपने निशान छोड़े। बस्तर में आई भीषण बाढ़ ने 12 लोगों की जान ले ली और 91 गांवों को तबाह कर दिया।
वहीं, कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में रायपुर के कारोबारी दिनेश मिरानिया की हत्या ने यह बता दिया कि आतंकवाद की आग कितनी दूर तक झुलसा सकती है।
16 दिसंबर को कांकेर में धर्मांतरण को लेकर हुआ बवाल, जिसने एक शव को दफनाने के मुद्दे पर समाज को दो हिस्सों में बांट दिया और पुलिसकर्मियों को भी लहूलुहान कर दिया।
कुल मिलाकर, 2025 छत्तीसगढ़ के लिए मिश्रित भावनाओं वाला साल रहा। जहां हिडमा के खात्मे और नए विधानसभा ने उम्मीद जगाई, वहीं पत्रकार की हत्या और सांप्रदायिक तनाव ने हमें सोचने पर मजबूर किया। अब देखना होगा कि 2026 छत्तीसगढ़ के लिए क्या नया सवेरा लेकर आता है।




