10 साल बाद भी नहीं मिला प्रधानमंत्री आवास योजना का फ्लैट, इंतज़ार में चली गई आवेदिका की जान
आवेदिका श्रीमती गिरिजा सिंह का निधन हो गया, लेकिन उनका सपना अधूरा ही रह गया

AINS NEWS… छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ा है, जिसमें 10 वर्ष बीत जाने के बाद भी आवेदिका को आज तक फ्लैट नहीं मिल सका। फ्लैट का इंतज़ार करते-करते आवेदिका श्रीमती गिरिजा सिंह का निधन हो गया, लेकिन उनका सपना अधूरा ही रह गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्रीमती गिरिजा सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के फ्लैट के लिए निर्धारित राशि समय पर जमा की थी। नियमों के अनुसार उन्हें निश्चित समय-सीमा में आवास उपलब्ध कराया जाना था, लेकिन वर्षों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें फ्लैट नहीं सौंपा गया।

दुखद बात यह है कि लगातार इंतज़ार, मानसिक तनाव और प्रशासनिक उदासीनता के बीच श्रीमती गिरिजा सिंह की मृत्यु हो गई, परंतु हाउसिंग बोर्ड उन्हें उनका अधिकार नहीं दिला सका।
अब उनके पति द्वारा जब जमा की गई राशि की वापसी की मांग की गई, तो हाउसिंग बोर्ड केवल 2.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से राशि लौटाने की बात कर रहा है। जबकि फ्लैट की शर्तों में स्पष्ट रूप से 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज या उससे अधिक देने की बात कही गई थी।
परिवार का आरोप है कि जब 10 वर्षों तक आवास नहीं दिया जा सका, तो यह छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की अत्यंत खराब और लापरवाह स्थिति को दर्शाता है। प्रार्थी द्वारा हाउसिंग बोर्ड और संबंधित अधिकारियों, जिनमें अवनीश शरण का नाम भी शामिल है, के पास 100 से अधिक बार चक्कर लगाए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया।
यह मामला केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है। ऐसे सैकड़ों लोग हैं, जो वर्षों से अपने घर का इंतज़ार कर रहे हैं और हाउसिंग बोर्ड की कार्यशैली से परेशान हैं।
परिवार का यह भी कहना है कि स्वयं हाउसिंग बोर्ड के वकील ने यह स्वीकार किया है कि 7.5 प्रतिशत या उससे अधिक दर से ब्याज दिया जाना न्यायसंगत होगा, इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा कम ब्याज देने की बात कही जा रही है।
इस पूरे मामले ने प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजना की ज़मीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिला पाएगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।




