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पत्रकार देवेश तिवारी और समाजसेवी बसंत अग्रवाल के बीच तू तू मैं मैं की स्थिति, पत्रकार वार्ता में बिफरे देवेश

बसंत अग्रवाल ने कांग्रेस पार्टी के पप्पू बंजारे और उनके कार्यकर्ताओं को वामपंथी विचारधारा से प्रभावित होने का आरोप लगाया

AINS NEWS… आज समाजसेवी बसंत अग्रवाल ने एक पत्रकार वार्ता ली। इस पत्रकार वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ एक षड्यंत्र रचा जा रहा है उन्हें और उनके आयोजन को लेकर उन पर जमीन से जुड़े मामलों में उन्हें आरोपी बताया जा रहा है जबकि उस जमीन उसकी खरीदी बिक्री में उनका दूर-दूर से नाता नहीं है।

यह बातें खुद बसंत अग्रवाल ने कहीं, उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया में जो उनके खिलाफ खबरें प्रचारित और प्रसारित की जा रही हैं वह भी बुनियाद है। उनका जमीनी स्तर पर कोई लेना देना नहीं है। जिस जमीन की बात की जा रही है वह जमीन उनकी है ही नहीं वह जमीन तो किसी और की है जिन्हें उन्होंने खुद सामने किया उन्होंने एक बात कही वह फैक्ट है उन्होंने कहा की खबर चलाने वाले कम से कम दोनों पक्षों की तो सुन लें सिर्फ एक पक्ष का सुनकर खबर चला देना कैसी पत्रकारिता है, उन्होंने पत्रकारिता को लेकर भी अपनी पीड़ा जाहिर की उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे भी पत्रकार हैं जो किसी और का सुनकर खबर चला देते हैं और उनका पक्ष लेते भी नहीं है।

उन्होंने बाकायदा देवेश तिवारी का नाम लिया, देवेश तिवारी भी एक पत्रकार हैं जब देवेश तिवारी का नाम उन्होंने लिया तो देवेश तिवारी उनसे फिर सवाल करने लगे, देवेश तिवारी के सभी सवालों का बसंत अग्रवाल ने जवाब दिया और उन्होंने कहा है कि अगर आपने कोई खबर चलाई तो क्या उनका पक्ष लिया उन्होंने यह भी कहा कि मैं उन्हें फोन किया उन्होंने फोन नहीं उठाया तो देवेश तिवारी ने कहा कि यदि मैं फोन उठा लिया होता तो आप मुझ पर भी पैसा मांगने का आरोप लगा देते यह सुनकर पत्रकारों की हंसी छूट गई

बसंत अग्रवाल ने कांग्रेस पार्टी के पप्पू बंजारे और उनके कार्यकर्ताओं को वामपंथी विचारधारा से प्रभावित होने का आरोप लगाया जिसे लेकर देवेश तिवारी कहने लगे कि आप पत्रकारों को वामपंथी कह रहे हैं लेकिन उन्होंने कांग्रेस पार्टी की विचारधारा और कांग्रेस पार्टी के नेता पप्पू बंजारे को वामपंथी विचारधारा से अभिभूत होना बताया। पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में जितना बसंत अग्रवाल लाइमलाइट में रहे उतने ही ज्यादा देवेश तिवारी भी लाइन लाइट में रहे लेकिन इससे कहीं ना कहीं पत्रकारिता पर सवाल इंसान उठ गया है

 

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