संगवारी भेंट: समय थम सा गया, वर्षों बाद स्कूल की दहलीज पर गले मिले गुरु–शिष्य, यादों में फिर जिए सुनहरे दिन
पीएम श्री स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय में पहला पूर्व छात्र–शिक्षक मिलन समारोह भावनाओं से सराबोर होकर संपन्न

AINS NEWS गरियाबंद… पीएम श्री स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम शासकीय विद्यालय, गरियाबंद में रविवार को आयोजित पहला “संगवारी भेंट” पूर्व छात्र–शिक्षक मिलन समारोह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि स्मृतियों, सम्मान और कृतज्ञता का जीवंत उत्सव बन गया। वर्षों पहले इसी विद्यालय से निकलकर जीवन की अलग-अलग राहों पर आगे बढ़ चुके छात्र जब अपने गुरुओं से फिर आमने-सामने हुए, तो स्कूल की दहलीज पर समय जैसे ठहर गया।

विद्यालय परिसर में जैसे ही पूर्व छात्रों ने कदम रखा, बीते दिनों की यादें ताजा हो उठीं। वही कक्षाएं, वही बरामदे, वही प्रांगण—जहां कभी सपने गढ़े गए थे। ब्लैकबोर्ड, बेंच और दीवारों को छूते हुए छात्र अपने स्कूली दिनों में लौट गए। कहीं ठहाकों की गूंज थी, तो कहीं आंखें नम नजर आईं। वर्षों बाद मिले मित्र गले मिले, अपनापन छलक उठा और हर चेहरा भावनाओं से भरा दिखा।
गुरुओं का सम्मान, दिवंगत शिक्षकों को श्रद्धांजलि
समारोह की शुरुआत वरिष्ठ शिक्षकों के सम्मान से हुई। वर्षों तक विद्यालय की सेवा करने वाले शिक्षकों को शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं दिवंगत शिक्षकों को याद करते हुए मौन रखकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह पल पूरे समारोह को भावुक कर गया।

प्रशांत मानिकपुरी बोले— यह केवल मिलन नहीं, कृतज्ञता का भाव है
कार्यक्रम का आयोजन प्राचार्य एवं शाला प्रबंधन विकास समिति के अध्यक्ष प्रशांत मानिकपुरी के नेतृत्व में किया गया। स्वागत भाषण में उन्होंने कहा—
“यह आयोजन केवल पूर्व छात्र–शिक्षक मिलन नहीं है, बल्कि उन गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता का भाव है, जिनका आशीर्वाद जीवन भर मार्गदर्शन करता है। इसी विद्यालय की देन है कि आज यहां से पढ़े विद्यार्थी प्रशासनिक, सामाजिक, राजनीतिक और व्यवसायिक क्षेत्रों में गरियाबंद का नाम रोशन कर रहे हैं।”
सेवानिवृत्त शिक्षकों की भावुक प्रतिक्रियाएं
सेवानिवृत्त शिक्षक आर.पी. मिश्रा ने इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि वर्षों बाद इस तरह का मिलन किसी सौभाग्य से कम नहीं है।
वहीं सेवानिवृत्त शिक्षक भारत मोंगरे ने कहा कि इस ऐतिहासिक मिलन की अनुभूति शब्दों में बयां करना कठिन है। उन्होंने माउथ ऑर्गन की प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को भावनाओं से भर दिया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम और यादों की सौगात
कार्यक्रम के दौरान स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक एवं संगीतमय प्रस्तुतियां दीं, जिसने समारोह को और भी जीवंत बना दिया। इसके बाद शिक्षकों और छात्रों ने बेंच पर बैठकर सामूहिक फोटो खिंचवाए। सभी पूर्व छात्रों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए, ताकि यह दिन जीवन भर यादों में जीवित रहे।
गरियाबंद सहित दीगर जिलों से पहुंचे पूर्व छात्र
इस अवसर पर गरियाबंद सहित अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में पूर्व छात्र पहुंचे। कार्यक्रम में एम.एल. चंद्र, पूर्व संसदीय सचिव गोवर्धन सिंह मांझी, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष नेहरू निषाद, युगल पांडेय, आशु सिन्हा, बिक्रम हूंदल, प्रकाश अवस्थी, इमरान ख़ान, रवि सोनवानी, गफ्फू मेमन, मुरलीधर सिन्हा, दिनानाथ साहू, फागुलाल कश्यप, संजय कन्नौजे, सत्येंद्र दिवाकर, प्रवीण मानिकपुरी, डॉ. यूसुफ मेमन, रिखीराम यादव, ऋषिकांत मोहरे, सुब्रत पात्र, जितेंद्र सेन, आशीष तिवारी सहित अनेक पूर्व छात्रों ने अपने विचार रखे और समाज व राष्ट्रहित में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
शिक्षकों का गरिमामय सम्मानइस अवसर पर मदन सिंह ध्रुव, एम.एल. चंद्र, बलवंत ठाकुर, आर.पी. मिश्रा, के.पी. पटेल, कन्नौज, भरत मोंगरे, परिहार, दाउ, बी.पी. देवांगन, पाल, करन चंद्राकर, फारूक अहमद, मरकाम, जूनियर साहू, गंगा सागर, आई.पी. साहू, सिन्हा, श्याम चंद्राकर, वंदना पांडे, रेखा शुक्ला, मृदुला तिवारी एवं देवेश सूर्यवंशी को शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर गफ़्फू मेमन ने भावुक होते हुए कहा कि “मुझे स्कूल छोड़े आज पूरे 27 वर्ष हो गए हैं, लेकिन ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब मैं एक या दो बार स्कूल घूमने ना आऊ । इस विद्यालय से जुड़ी यादें आज भी मेरे साथ चलती हैं।”

उन्होंने कहा कि “वर्षों बाद अपने पुराने शिक्षकों और बचपन के मित्रों से एक ही मंच पर मिलना मेरे लिए बेहद खुशी और गर्व का क्षण है। ऐसा लगा जैसे समय पीछे लौट गया हो और हम फिर से वही विद्यार्थी बन गए हों।”गफ़्फू मेमन ने कहा कि “इस विद्यालय ने हमें केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि जीवन के मूल्य, अनुशासन और सही राह पर चलने की सीख दी है, जिसे मैं आज भी अपने जीवन में आत्मसात किए हुए हूं।”
इस अवसर पर प्राचार्य एवं शाला प्रबंधन विकास समिति के अध्यक्ष प्रशांत मानिकपुरी ने कहा कि “संगवारी भेंट केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि गुरु–शिष्य परंपरा को सहेजने और जीवंत रखने का माध्यम है। यह वह रिश्ता है, जो समय और दूरी की सीमाओं से परे जीवन भर मार्गदर्शन करता है।”उन्होंने कहा कि इसी विद्यालय ने विद्यार्थियों को संस्कार, अनुशासन और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की सीख दी है। “आज यह देखकर गर्व होता है कि यहां से निकले विद्यार्थी प्रशासनिक, सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षणिक और व्यवसायिक क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं और गरियाबंद सहित पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं।”
प्रशांत मानिकपुरी ने कहा कि गुरुजनों का योगदान किसी भी विद्यार्थी के जीवन की नींव होता है। “शिक्षक केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाते, बल्कि जीवन को दिशा देते हैं। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपने अतीत से जुड़ने और मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है।”
कार्यक्रम का संचालन गिरीश शर्मा ने किया। आयोजन को सफल बनाने में पूरे विद्यालय परिवार, स्टाफ और स्कूली बच्चों का सराहनीय सहयोग रहा।




