क्या नियम सिर्फ आम आदमी के लिए हैं? अधिकारियों के लिए कानून अलग है? जांजगीर-चांपा में बड़ा सवाल
बिना टैक्सी परमिट दौड़ रही गाड़ियां, कार्रवाई के लिए ‘शिकायत’ का इंतजार!

AINS NEWS… जांजगीर-चांपा में परिवहन विभाग की उदासीनता के चलते बिना टैक्सी परमिट के सड़कों पर गाड़ियां दौड़ रही हैं और जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बना हुआ है, हैरानी की बात ये है कि इन्हीं गाड़ियों में कई विभागों के अधिकारी आराम से A/C का मजा लेते हुए शहर में घूम रहे हैं!

“लेकिन जैसे ही आम जनता की गाड़ी बिना परमिट के निकलती है तुरंत चालान, कार्रवाई और सख्ती!”
सवाल
“क्या नियम सिर्फ आम आदमी के लिए हैं? क्या अधिकारियों के लिए कानून अलग है?”
जब इस पूरे मामले में परिवहन विभाग से बात की गई तो जवाब मिला ‘शिकायत आएगी, तब कार्रवाई करेंगे। यानि साहब इंतजार कर रहे हैं शिकायत का, सवाल ये है जब खुद चेकिंग के लिए निकलते हैं तो फिर शिकायत का इंतजार क्यों?”
“क्या जिले के DM, कप्तान और विभागीय गाड़ियों पर भी यही नियम लागू होते हैं? अगर बिना परमिट गाड़ियां चल रही हैं तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं?”
क्या परिवहन विभाग किसी दबाव में है या फिर ‘सब ठीक है’ का खेल चल रहा है?” जांजगीर-चांपा में कानून का ये दोहरा मापदंड कब खत्म होगा? क्या जिम्मेदार अधिकारी जागेंगे या फिर यूं ही चलता रहेगा नियमों का ये खेल?




