गरियाबंद

नौकरी दिलाने के नाम पर 1.80 लाख रुपये की ठगी का आरोप, कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

जनदर्शन में दिए गए इस आवेदन के बाद मामले की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी

AINS NEWS गरियाबंद… नौकरी दिलाने के नाम पर 1 लाख 80 हजार रुपये की ठगी किए जाने का आरोप लगाते हुए एक युवक ने जनदर्शन में कलेक्टर को आवेदन सौंपकर राशि वापस दिलाने और संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
ग्राम धवलपुर निवासी यशवंत सिन्हा ने कलेक्टर को दिए आवेदन में बताया कि वह बेरोजगार था। इसी दौरान उसकी पहचान गरियाबंद निवासी एक शिक्षक के माध्यम से मुंगेली जिले के डोंगरीगांव निवासी से कराई गई। आरोप है कि भागवत पट्टा ने स्वयं को आदिवासी विकास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का करीबी बताते हुए आश्रम शाला में चपरासी की नौकरी दिलाने का भरोसा दिया और इसके एवज में 1 लाख 80 हजार रुपये की मांग की।

आवेदन के अनुसार अगस्त 2024 में अलग-अलग किश्तों में नगद एवं बैंक खाते के माध्यम से कुल 1.47 लाख रुपये दिए गए।बाद में शेष राशि भी देने का दावा किया गया है। युवक का आरोप है कि पूरी रकम लेने के बाद उसे 25 सितंबर 2024 को आदिवासी बालक आश्रम धवलपुर में दैनिक मजदूर के रूप में काम पर रखा गया,जबकि कोई नियुक्ति आदेश जारी नहीं किया गया था।
यशवंत सिन्हा का कहना है कि वह लगभग 19 माह तक आश्रम में कार्यरत रहा,लेकिन इस अवधि में उसे केवल छह माह का ही मजदूरी भुगतान प्राप्त हुआ। उसके बैंक खाते में विभागीय खाते से कुछ किश्तों में मजदूरी राशि जमा हुई,जबकि शेष अवधि का भुगतान नहीं किया गया।इससे उसे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि 21 जनवरी 2026 को आश्रम प्रबंधन द्वारा उसे यह कहकर काम से हटा दिया गया कि अब केवल स्वीकृत पदों पर विधिवत नियुक्त कर्मचारियों को ही रखा जाएगा। इसके बाद संबंधित लोगों द्वारा केवल 30 हजार रुपये लौटाए गए,जबकि शेष राशि अब तक वापस नहीं की गई है।

पीड़ित ने आरोप लगाया है कि नौकरी दिलाने के नाम पर उससे धोखाधड़ी की गई और आर्थिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।प्रार्थी ने बताया कि उनके द्वारा शिकायत करने की बात कहने के दौरान आरोपी द्वारा किश्तो में 80 हजार तो वापस किया गया लेकिन अभी तक शेष एक लाख रुपये वापस नहीं किया गया है।प्रार्थी द्वारा कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने तथा उसकी शेष राशि वापस दिलाने की मांग की है। जनदर्शन में दिए गए इस आवेदन के बाद मामले की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

 

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