गरियाबंद

मुख्यमंत्री के दौरे से पहले कांग्रेस जिलाध्यक्ष नजरबंद, कांग्रेस ने बताया लोकतंत्र का हनन

काला झंडा प्रदर्शन की आशंका पर पुलिस की कार्रवाई

AINS NEWS गरियाबंद… मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित प्रदेश के कई वरिष्ठ मंत्रियों के गरियाबंद दौरे से पहले जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुखचंद बेसरा को पुलिस द्वारा उनके निवास पर निगरानी में रखे जाने का मामला राजनीतिक विवाद का विषय बना रहा।कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया है।

बुधवार को जिला मुख्यालय स्थित पुलिस लाइन मैदान में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय,कृषि मंत्री रामविचार नेताम,खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, सांसद रूपकुमारी चौधरी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के द्वारा विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होना था। इस दौरान कांग्रेस द्वारा खाद की कमी, बढ़ती महंगाई,पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि, बेरोजगारी तथा अन्य जनसमस्याओं को लेकर काला झंडा दिखाकर विरोध प्रदर्शन की तैयारी की जा रही थी।कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इसी आशंका के चलते देवभोग पुलिस ने जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुखचंद बेसरा को उनके गृह ग्राम दरलीपारा स्थित निवास पर ही नजरबंद कर दिया, ताकि वे जिला मुख्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन में शामिल न हो सकें।

नजरबंद किए जाने के बाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक दल का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के इशारे पर प्रशासन विपक्षी नेताओं को रोकने का काम कर रहा है।

बेसरा ने कहा कि प्रदेश में खाद संकट, जंगलों की कटाई, बेरोजगारी,बढ़ती बिजली दरें,महंगाई तथा अन्य जनहित के मुद्दों को उठाना यदि अपराध माना जा रहा है तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।उन्होंने भाजपा सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता के मुद्दों को दबाने की कोशिश अंततः सरकार के लिए नुकसानदायक साबित होगी।

घटना की जानकारी मिलते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में नाराजगी फैली रही।पार्टी नेताओं ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।वहीं सोशल मीडिया सहित विभिन्न मंचों पर भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
मुख्यमंत्री के दौरे से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई ने जिले की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष इसे दमनात्मक कार्रवाई बता रहा है,जबकि प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह घटनाक्रम आगामी दिनों में राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बन सकता है।

 

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