नक्सल दहशत से पर्यटन की नई पहचान तक: गरियाबंद के जंगलों में पहुंचे एडवेंचर बाइकर्स
जोहार बाइकर्स ग्रुप ने आमामोरा और हॉर्नबिल सफारी का किया भ्रमण, प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन संभावनाओं की सराहना

AINS NEWS/जीवन एस साहू/गरियाबंद… एक समय नक्सली गतिविधियों के कारण दहशत का पर्याय रहे गरियाबंद के घने जंगल अब शांति, विकास और पर्यटन की नई पहचान बनते जा रहे हैं। बदलते हालात और नक्सलवाद के प्रभाव में कमी आने के बाद जिले के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की ओर पर्यटकों और एडवेंचर प्रेमियों का रुझान बढ़ा है। इसी क्रम में रायपुर के जोहार बाइकर्स ग्रुप के लगभग 25 सदस्य गरियाबंद पहुंचे और स्थानीय वाइल्ड विंग्स ग्रुप के साथ आमामोरा एवं ओड़ स्थित हॉर्नबिल सफारी का भ्रमण किया।

बाइकर्स ने क्षेत्र के घने जंगलों, प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता का करीब से अनुभव किया। जिन इलाकों में कभी सुरक्षा कारणों से लोगों का आवागमन सीमित था, वहां अब पर्यटन गतिविधियां बढ़ने लगी हैं। प्रशासन और वन विभाग भी जिले में इको-टूरिज्म एवं नेचर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। जलप्रपात, वन्यजीव और प्राकृतिक पर्यटन स्थल पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।
जोहार बाइकर्स ग्रुप के सदस्य नीलेश प्रजापति ने बताया कि उनका समूह गुजरात को छोड़कर देश के लगभग सभी राज्यों की बाइक यात्रा कर चुका है। हाल ही में वे 15 दिवसीय लेह-लद्दाख यात्रा से लौटे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में अपार संभावनाएं हैं और गरियाबंद का प्राकृतिक वातावरण, शांत माहौल तथा घने जंगल किसी भी एडवेंचर प्रेमी को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त हैं।

गरियाबंद पहुंचने पर पुलिस एवं वन विभाग के अधिकारियों ने बाइकर्स का स्वागत किया। इस दौरान डीएसपी लितेश सिंह ने सड़क सुरक्षा और जिम्मेदार पर्यटन का संदेश देते हुए वाहन चलाते समय हेलमेट के उपयोग, यातायात नियमों के पालन तथा निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाने की अपील की। उन्होंने पर्यटकों से पर्यटन स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने और नशे से दूर रहने का आग्रह भी किया।
स्थानीय वाइल्ड विंग्स ग्रुप के कमलेश यादव, खिलेश निषाद, कनक लता, आयुष वैष्णव ने कहा कि गरियाबंद की प्राकृतिक धरोहर और वन क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से बेहद समृद्ध हैं। यदि इन स्थलों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए तो जिले को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर विशेष पहचान मिल सकती है। कहा कि गरियाबंद में बहुत से ऐसे वाटरफॉल हैं, जिन्हें लोग नहीं जानते, उनकी जानकारी लोगों तक पहुंचाना हमारा उद्देश्य है। गरियाबंद का यह बदलता स्वरूप नक्सल प्रभावित क्षेत्र से पर्यटन केंद्र बनने की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण बनकर उभर रहा है। जिन जंगलों में कभी भय का माहौल था, आज वहीं पर्यटक, प्रकृति प्रेमी और एडवेंचर बाइकर्स पहुंचकर प्रकृति का आनंद ले रहे हैं। यह बदलाव जिले में विकास, शांति और पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाता है।




