उदंती में चीतल के शिकार का खुलासा: मांस और खून से सने तीर बरामद, डॉग स्क्वाड ‘टीना’ की मदद से दो शिकारी गिरफ्तार
सर्च वारंट के आधार पर नरेश कुमार भुजिया और बालाराम सोरी के घरों की तलाशी ली गई

AINS NEWS गरियाबंद… उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों के शिकार पर लगाम कसने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। ग्राम अमाड़ में चीतल के शिकार की गोपनीय सूचना पर एंटी पोचिंग टीम ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के घर से चीतल के मांस की सब्जी, खून से सने तीर, खरगोश पकड़ने के फंदे, मयूर और बाज के पंख सहित बड़ी मात्रा में शिकार सामग्री बरामद की गई है।

जानकारी के अनुसार उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी पोचिंग टीम को सूचना मिली थी कि ग्राम अमाड़ में वन्यप्राणी का शिकार किया गया है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम, डॉग स्क्वाड और उत्तर उदंती वन परिक्षेत्र के कर्मचारियों ने संयुक्त अभियान चलाया। सर्च वारंट के आधार पर नरेश कुमार भुजिया और बालाराम सोरी के घरों की तलाशी ली गई।
तलाशी के दौरान टीम को टिफिन में रखा चीतल के मांस का पकाया हुआ भोजन, खून से सने चार तीर, पांच फंदे, सात मयूर पंख, चार बाज पंख, दो धनुष, दो धनुष गुलेल और अन्य शिकार उपकरण मिले। बरामदगी के बाद दोनों आरोपियों को पूछताछ के लिए वन परिक्षेत्र कार्यालय मैनपुर लाया गया।
पूछताछ में आरोपी नरेश कुमार ने 17 जून को तारीपानी घाट क्षेत्र में तीर-धनुष से चीतल का शिकार करना स्वीकार कर लिया। इसके बाद वन विभाग की टीम आरोपियों को घटनास्थल पर भी लेकर गई, जहां शिकार स्थल की पहचान कराई गई।
मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों को जिला एवं अपर सत्र न्यायालय गरियाबंद में पेश किया गया। वहीं बरामद चीतल के मांस के नमूनों को फोरेंसिक जांच के लिए स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ, जबलपुर भेजा गया है।
इस पूरी कार्रवाई में एंटी पोचिंग टीम, वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा डॉग स्क्वाड “टीना” की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों के शिकार में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।




