आर्थिक शोषण के खिलाफ सांकेतिक प्रदर्शन, 11 सितम्बर को मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन
केन्द्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता स्वीकृत तो राज्य सेवा के अधिकारी कर्मचारियों को देय तिथि से क्यो नही ?

AINS NEWS… प्रदेश के विकास में अहम भूमिका निभाने वाले शासकीय विभागों के नियमित, अनियमित और सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने शासन-प्रशासन के उदासीन रवैये के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। ‘‘एक मांग एक मंच अभियान’’ के *प्रदेष संयोजक करन सिंह अटेरिया*, प्रान्ताध्यक्ष, प्रदेष अधिकारी कर्मचारी संघ द्वारा अवगत कराया गया है कि एक मांग एक मंच अभियान के बैनर तले आगामी 11 सितंबर (शुक्रवार) को नवा रायपुर स्थित विभागाध्यक्ष कार्यालय (इंद्रावती भवन) के सामने भोजनावकाश के दौरान कर्मचारी सांकेतिक प्रदर्शन करेंगे। प्रदर्शन के उपरांत इंद्रावती भवन के नोडल अधिकारी के माध्यम से मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस प्रदर्शन में इंद्रावती भवन स्थित विभिन्न विभागों के अमले सहित 50 से अधिक कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

*मोदी जी की गारंटी पुरी नही होने से नाराज है प्रदेश के कर्मचारी व पेंशनर*
कर्मचारी नेताओं ने रोष जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को लगातार ज्ञापन सौंपने के बाद भी शासन उनकी समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘‘मोदी की गारंटी 2023 वचनबद्ध सुशासन’’ घोषणा पत्र में सभी वर्ग के कर्मचारियों और पेंशनरों से किए गए वादों की लगातार अनदेखी की जा रही है। वर्ष 2017 से राज्य सेवा के अधिकारी/कर्मचारी को महंगाई भत्ता 08 से 10 माह बाद विलंब से दिया जाना तथा भारतीय सेवा के अधिकारियों को केन्द्र के समान देय तिथि से दिये जाने के कारण राज्य सेवा के अधिकारी/कर्मचारी तथा पेंषनरों के साथ भेद-भाव प्रतीत हो रहा है।
*प्रदेश के अधिकारी/कर्मचारी एवं पेंशनरो की प्रमुख मांगें*
कर्मचारियों और पेंशनरों को जनवरी 2026 से केंद्र के समान 02 प्रतिषत महंगाई भत्ता एवं महंगाई राहत तथा विगत 86 माह का लंबित महंगाई भत्ता एरियर्स तुरंत प्रदान किया जाए। अनियमित, कर्मचारियों का नियमितीकरण, सेवा से निकाले गए कर्मियों की बहाली, न्यूनतम मानदेय पाने वालों को न्यूनतम वेतन, अंशकालीन कर्मियों को पूर्णकालीन दर्जा तथा आउटसोर्सिंग व ठेका व्यवस्था को तत्काल बंद करना। नगरीय निकाय के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना का लाभ सुनिश्चित किया जाए। स्वास्थ्य विभाग की लैब्स और फार्मेसी में संचालित ठेका पद्धति को पूरी तरह समाप्त किया जाए। मध्य प्रदेश सरकार की तर्ज पर छत्तीसगढ़ के नियमित, अनियमित कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए 20 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू की जाए तथा अवकाष नगदीकरण की सीमा 240 से बढ़ा कर 300 दिवस की जावें।




