2000 फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजमान मां गरजई धाम: आस्था, चमत्कारिक जनश्रुतियों और प्रकृति का अद्भुत संगम
नवरात्रि में उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब, भक्तों के दान से बन रहा भव्य मंदिर; पर्यटन एवं धार्मिक न्यास बोर्ड में शामिल करने की उठी मांग

AINS NEWS/JIVAN S.SAHU/गरियाबंद… छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर अनेक ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जहां प्रकृति की अनुपम सुंदरता और जन-जन की अटूट आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। ऐसा ही एक अलौकिक एवं आस्थामय स्थल जिला मुख्यालय गरियाबंद से लगभग 17 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत पीपरछेड़ी के मदनपुर के समीप करीब 2000 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित मां गरजई धाम है।

नवरात्रि के पावन अवसर पर यहां दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। मां के जयकारों से पहाड़ी का वातावरण भक्तिमय हो उठा है। वहीं, क्षेत्रवासियों ने इस ऐतिहासिक एवं आस्थामय स्थल को पर्यटन बोर्ड और धार्मिक न्यास बोर्ड से जोड़कर विकसित करने की मांग प्रशासन से की है।

*हरी-भरी वादियों के बीच विराजमान पहाड़ावाली मां गरजई*
ऊंची पहाड़ी, चारों ओर फैली हरियाली और प्रकृति की मनमोहक छटा के बीच स्थित मां गरजई का दरबार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। पहाड़ की ऊंचाई पर विराजमान माता रानी के दर्शन करने पहुंचने वाले भक्त यहां के मनोरम प्राकृतिक दृश्यों को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।
नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु बड़ी संख्या में माता के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। कोई परिवार की सुख-समृद्धि की कामना लेकर आता है, तो कोई अपने जीवन की परेशानियों से मुक्ति और मनोकामना पूर्ति के लिए माता के चरणों में शीश नवाता है।
*मनोकामना देवी के रूप में पूजित हैं मां गरजई*
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मां गरजई को मनोकामना पूर्ण करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। विशेषकर संतान सुख की प्रतीक्षा कर रहे निसंतान दंपतियों के बीच इस धाम के प्रति गहरी आस्था है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से मां के दरबार में प्रार्थना करने पर माता रानी अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं।
मंदिर समिति के सदस्यों के अनुसार, समीपस्थ ग्राम बारूला की एक बच्ची, जिसके जन्म से ही दृष्टि नहीं होने की बात बताई जाती है, पिछले वर्ष माता के दरबार में पहुंची थी। परिजनों ने श्रद्धापूर्वक ज्योति प्रज्वलित कर प्रार्थना की थी। समिति के सदस्यों के कथनानुसार, इसके बाद बच्ची को दिखाई देने की शुरुआत हुई। स्थानीय श्रद्धालु इस प्रसंग को माता की कृपा से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, इस संबंध में स्वतंत्र चिकित्सकीय पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

*मां के दरबार के समीप मौजूद अद्भुत शिला, स्पर्श करने पर सुनाई देती है घंटे जैसी ध्वनि*
मां गरजई धाम की विशेषताओं में यहां मौजूद एक अद्भुत शिला का भी उल्लेख किया जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर के ठीक बगल में स्थित इस शिला को किसी वस्तु से स्पर्श करने अथवा हल्की ठोकर लगाने पर घंटे जैसी गूंजती हुई ध्वनि सुनाई देती है।
इस अनूठी ध्वनि को सुनने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता रहती है। माता के दरबार के समीप आज भी मौजूद यह शिला धाम के प्रति लोगों की जिज्ञासा और आकर्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनी हुई है। प्रकृति की इस अनोखी संरचना को लेकर स्थानीय लोगों के बीच अनेक तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं।
*अकाल की आहट पर माता के दरबार में होता था राम सप्ताह*
मंदिर के पुजारी के अनुसार, जब क्षेत्र में लंबे समय तक बारिश नहीं होती थी और सूखे जैसी स्थिति निर्मित होने लगती थी, तब आसपास के गांवों के ग्रामीण एकजुट होकर माता के दरबार में राम सप्ताह का आयोजन करते थे।
पुजारी के बताए अनुसार, ऐसे आयोजनों के बाद कई अवसरों पर 24 घंटे के भीतर बारिश होने की घटनाएं हुईं, जिन्हें ग्रामीण माता की कृपा और इंद्रदेव की प्रसन्नता से जोड़कर देखते हैं। कृषि प्रधान क्षेत्र में वर्षा का विशेष महत्व होने के कारण यह परंपरा आज भी स्थानीय जनआस्था का हिस्सा बनी हुई है।

*भक्तों के दान से हो रहा भव्य मंदिर का निर्माण*
मां गरजई धाम की धार्मिक महत्ता को देखते हुए पहाड़ी पर माता रानी के भव्य मंदिर का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि मंदिर निर्माण के लिए भक्तों द्वारा श्रद्धापूर्वक दी जाने वाली दान राशि का उपयोग किया जा रहा है।
श्रद्धालुओं की आस्था और सहयोग से मंदिर को भव्य स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है। यह निर्माण कार्य इस बात का प्रतीक है कि मां गरजई के प्रति लोगों की श्रद्धा केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि वे इस धाम के विकास में भी अपनी सहभागिता निभा रहे हैं।
हालांकि, ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस धार्मिक स्थल तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए बुनियादी सुविधाओं के विकास की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है।
*पर्यटन बोर्ड एवं धार्मिक न्यास बोर्ड में शामिल करने की मांग*
मां गरजई धाम की धार्मिक महत्ता, प्राकृतिक सुंदरता और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस धाम को छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड एवं धार्मिक न्यास बोर्ड से जोड़ने की दिशा में पहल की जाए।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि शासन-प्रशासन इस धार्मिक स्थल के विकास पर ध्यान दे, तो यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। साथ ही, इस प्राकृतिक एवं धार्मिक धरोहर को व्यापक पहचान मिलने से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
क्षेत्रवासियों की प्रमुख अपेक्षाएं हैं कि धाम तक पहुंचने वाले मार्ग को बेहतर बनाया जाए, श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था हो, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था एवं विश्राम स्थल जैसी आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएं। इसके साथ ही, पहाड़ी की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए सुनियोजित विकास किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच धाम की पवित्रता और प्राकृतिक विरासत भी अक्षुण्ण बनी रहे।
*प्रशासन की पहल से मिल सकती है धार्मिक पर्यटन को नई पहचान*
मां गरजई धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र की लोकआस्था, सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संपदा का महत्वपूर्ण केंद्र है। नवरात्रि में उमड़ती श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का संकेत है कि इस धाम में धार्मिक पर्यटन की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं।
यदि प्रशासन क्षेत्रवासियों की मांग पर गंभीरता से विचार करते हुए पर्यटन एवं धार्मिक विकास की दिशा में ठोस पहल करता है, तो मां गरजई धाम को नई पहचान मिल सकती है। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
अब देखना यह है कि मां गरजई धाम की महत्ता और क्षेत्रवासियों की मांग पर शासन-प्रशासन कब तक संज्ञान लेता है और इस आस्थामय स्थल को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।




