सहकारी समिति में नियमों की छुट्टी, प्रभारी प्रबंधक की नियुक्ति पर उठे सवाल
योग्यता और वरिष्ठता दरकिनार हुई या प्रक्रिया का हुआ पालन? मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से कलेक्टर जनदर्शन तक शिकायत

AINS NEWS गरियाबंद… आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित बिंद्रानवागढ़ में प्रभारी प्रबंधक का दायित्व सौंपे जाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। समिति में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, वरिष्ठता एवं छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी सेवा नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। इस संबंध में भाजपा अनुसूचित मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष तरुण कुमार ठाकुर ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराते हुए मामले की निष्पक्ष जाँच और उचित कार्रवाई की माँग की है।

शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि जब किसी पद पर दायित्व सौंपने के लिए नियम, योग्यता, अनुभव और वरिष्ठता निर्धारित हैं, तो क्या संबंधित प्राधिकारी ने इन सभी पहलुओं की जाँच करने के बाद ही निर्णय लिया है? यदि नियमों का पालन किए बिना किसी कर्मचारी को महत्वपूर्ण पद का प्रभार सौंपा गया है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर कौन तय करेगा?
समिति में प्रभारी प्रबंधक का पद केवल नाम या औपचारिकता का विषय नहीं, बल्कि वित्तीय, प्रशासनिक और संस्थागत जिम्मेदारियों से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व है। ऐसे में नियुक्ति अथवा कार्यभार सौंपने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन अनिवार्य है। यदि निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी हुई है, तो यह न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि पात्र एवं वरिष्ठ कर्मचारियों के अधिकारों को भी प्रभावित कर सकता है।

कटाक्ष करते हुए शिकायतकर्ता ने यह सवाल उठाया है कि क्या सहकारी संस्थाओं में सेवा नियम केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं, या फिर उनका पालन जिम्मेदार अधिकारियों के निर्णयों में भी दिखाई देगा? यदि नियमों के अनुसार पात्रता और वरिष्ठता का परीक्षण आवश्यक है, तो संबंधित अभिलेखों की जाँच किए बिना किसी निर्णय को उचित कैसे माना जा सकता है?
शिकायत में संबंधित कर्मचारी की शैक्षणिक योग्यता, नियुक्ति संबंधी दस्तावेज, कार्यानुभव, पद की पात्रता, वरिष्ठता तथा कार्यभार सौंपने के आदेश की जाँच करने की माँग की गई है। साथ ही, छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी सेवा नियम, 2018 अथवा प्रकरण में लागू अन्य प्रासंगिक नियमों के आधार पर निर्णय की वैधानिकता की समीक्षा किए जाने का आग्रह किया गया है।
अब सवाल जवाबदेही का है
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत पहुँचने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग मामले की जाँच कितनी गंभीरता से करता है। क्या अभिलेखों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लिया जाएगा, क्या नियमों के अनुरूप पात्र कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा होगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता प्रमाणित होती है, तो क्या जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी?
शिकायतकर्ता की माँग है कि मामले की निष्पक्ष जाँच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए तथा अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। सहकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि पदों का दायित्व व्यक्तिगत पसंद या प्रभाव के आधार पर नहीं, बल्कि लागू नियमों, पात्रता और पारदर्शी प्रक्रिया के अनुरूप सौंपा जाए।

सहायक पंजीयक का पक्ष
इस संबंध में जिला गरियाबंद की सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं कु. माहेश्वरी तिवारी से दूरभाष के माध्यम से चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि प्रभारी प्रबंधक के दायित्व सौंपे जाने से संबंधित मामला जाँच के लिए उनके पास आया है। फिलहाल जाँच पूरी नहीं हुई है। जाँच पूरी होने के बाद ही इस मामले में आगे की जानकारी दी जा सकेगी।
“नियम सबके लिए समान हैं तो उनका पालन भी सबके लिए समान होना चाहिए। सहकारी संस्थाओं में पद किसी की कृपा से नहीं, बल्कि पात्रता और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर मिलने चाहिए।”




