छत्तीसगढ़

अंग्रेजों के द्वारा बनाई गई कलेक्टर राज व्यवस्था फूट डालो राज करो वाली नीति, अडानी पावर प्लांट की जनसुनवाई तत्काल रद्द करें – हुलास साहू

छत्तीसगढ़ में अडानी से टेंपो भर-भर के पैसा किसको मिल रहा है जिससे प्रभावित किसान हित में निर्णय नही हो रहा है - धर्मेंद्र बैरागी

AINS NEWS… छत्तीसगढ़ ग्राम विकास एकता समिति के सचिव धर्मेंद्र बैरागी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि रायखेड़ा, चिचोली, गैतरा, सोनतरा, गौरखेड़ा बंगोली सहित सभी प्रभावित गांव वालो और किसानों से शिकायत मिल रही है कि अडानी एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड रायखेड़ा चिचोली के संबंध में जनसुनवाई 22 जून 2024 को प्रस्तावित है, उक्त जनसुनवाई को रद्द कर उसकी जगह प्रभावित ग्राम पंचायत में ग्रामसभा कराए जाने कि मांग को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम कलेक्टर रायपुर को छत्तीसगढ़ ग्राम विकास एकता समिति, छत्तीसगढ़ किसान महासभा, आल इंडिया सेंट्रल कौंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (एक्टू ), अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा के द्वारा संयुक्त प्रतिनिधि के उपस्थिति में ज्ञापन सौंपा गया।

समिति के अध्यक्ष हुलास साहू ने कहा कि जनता की परवाह किए बिना किसानों से कृषि जमीन अडानी एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लिए अधिग्रण तो कर ली है उसी जमीन से किसान अपने परिवारों का भरण पोषण कर सकता था जो मुवावजा मिला उससे पूरी जिंदगी अपना और परिवार का गुजर बसर नही कर सकता। इस कारण प्रभावित लोग और गरीब हो रहे है। मुबावजा तो मिल जाता है लेकिन जो कंपनी प्रबंधन के द्वारा किसान के परिवार को कुछ दिन रोजगार देकर रोजगार छीन कर बेरोजगार बना दिया गया। सभी प्रभावित गांव पंचायती राज के अधीन है तो कलेक्टर जनसुनवाई की जरूरत नही है अंग्रेजी के द्वारा बनाई गई कलेक्टर राज व्यवस्था फूट डालो राज करो वाली नीति, अडानी पावर प्लांट की जनसुनवाई तत्काल रद्द करें। सभी गांवों में ग्रामसभा की बैठक कराई जाय, पूरी एक तिहाई बहुमत के साथ गांव वाले अपने और गांव के हित में निर्णय लेंगे। उसके बाद सभी प्रभावित गांवों की सामूहिक ग्रामसभा की बैठक होनी चाहिए ।

गांव के लोगो को क्या चाहिए गांव वाले जानेंगे , 50 किलोमीटर दूर बैठा अधिकारी कलेक्टर थोड़े ही जान पायेंगे । पंचायती राज व्यवस्था जब लागू है तो कलेक्टर के द्वारा जनसुनवाई की क्या जरूरत है जितने प्रभावित ग्राम पंचायत है इन ग्रामों में ग्रामसभा में कंपनी संबंधित चर्चा करते हुए प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए। जनसुनवाई रद्द कर सभी प्रभावित ग्राम पंचायतों में ग्रामसभा की बैठक की आदेश जारी करे।

सभी ग्राम पंचायतों की सामूहिक ग्रामसभा की बैठक की भी आदेश जारी हो। जो इन ग्रामसभाओं में निर्णय होगा उसके बाद कलेक्टर कंपनी प्रबंधन और गांव वालो की एक सामूहिक बैठक कर गांव के हित फैसला हो। कारखाना अधिनियम 1948, श्रम अधिनियम, पर्यावरण अधिनियम का पालन नही हो रहा है, जिसका सुचारू रूप से निरंतर पालन होनी चाहिए सीएसआर फंड की राशि इन सभी गांवों के शिक्षा, स्वास्थ और स्वरोजगार, मूलभूत जैसे जनहित योजनाएं में खर्च होनी चाहिए।प्रभावित ग्राम में विकास कार्य दिखावे के रूप मे किया जा रहा है जिसे वास्तविक रूप में विकास किया जाना चाहिए। जिन किसानों का जमीन अधिग्रहण किया गया है उनके परिवार का एक सदस्य को नियमित कर्मचारी के रूप में रखना चाहिए, पर यहां ठेकेदार को सौंप दिया गया है, प्रभावित किसान के परिवार कुछ भी बहाने से बाहर निकाल दिया गया है । सबसे पहले उन्हें वापस बुलाया जाय और योग्यता व अनुभव के आधार पर नियमित कर्मचारी के रूप में कार्य दिया जाय। जिस तरह कंपनी के लिए पानी व्यवस्था किया गया है उसी तरह पाईप लाइन जहां से गुजरी है वहां के किसानों के लिए सिंचाई की व्यवस्था की जानी चाहिए , जिसमें आज तक ध्यान नहीं दिया गया है। कंपनी में स्थानीय मजदूर 80 प्रतिशत व बाहरी 20 प्रतिशत ही रखी जानी चाहिए।

माननीय महोदय से निवेदन है कि उक्त बिंदुओं पर त्वरित संज्ञान लेते हुए पंचायती राज व्यवस्था का उचित क्रियान्वयन करते हुए ग्रामसभा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रभावित गांव वालों और कंपनी प्रबंधन की विशेष ग्रामसभा की बैठक करा कर जनहित में निर्णय लेते हुए कलेक्टर जनसुनवाई की तत्काल रद्द करने की कृपा करे। प्रभावित गांव वालो की हित में निर्णय नही लेने की स्थिति में और जनसुनवाई रद्द नही करने की स्थिति में सभी संगठन मिलकर सामूहिक आंदोलन किया जाएगा।

ज्ञापन सौंपने समिति के प्रतिनिधि ग्राम विकास एकता समिति, अध्यक्ष हुलास साहू , सचिव- धर्मेंद्र बैरागी
छत्तीसगढ़ किसान महासभा
संयोजक- नरोत्तम शर्मा, आल इंडिया सेंट्रल कौंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (एक्टू ) जिला संयोजक – बिसहत कुर्रे, अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा जिला संयोजक – डॉ खंजन सिंह रात्रे मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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