बसवाराजू से भी ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है देवन्ना, इस खूंखार नक्सली पर 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का इनाम घोषित
'देवजी' कोई सामान्य अपराधी नहीं, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक 'सिरदर्द' है

AINS NEWS… हाल ही में, नक्सलियों के पूर्व महासचिव नंबाला केशव राव, जिसे बसवाराजू के नाम से जाना जाता था, के मारे जाने के बाद, नक्सली संगठन के भीतर एक बड़ा शून्य पैदा हो गया था। बसवाराजू, भारत का सबसे खूंखार नक्सली नेता माना जाता था। वारंगल के इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही वह रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़ गया था। 1979 में एक संघर्ष में उसकी गिरफ्तारी हुई, लेकिन 1980 में जमानत पर रिहा होते ही वह अंडरग्राउंड हो गया। 21 मई 2025 को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ के घने जंगलों में एक बड़े ऑपरेशन में, डीआरजी और कोबरा के जवानों ने 50 घंटे की घेराबंदी के बाद बसवाराजू समेत 28 माओवादियों को मार गिराया। माना जाता है कि आंतरिक विश्वासघात के कारण उसकी लोकेशन लीक हुई थी। इस ऑपरेशन को नक्सलियों की कमर तोड़ने वाला माना जा रहा था।

लेकिन अब, बसवाराजू की मौत के बाद, संगठन ने एक ऐसे चेहरे को कमान सौंपी है, जो शायद उससे भी ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है। और ये चेहरा है – थिप्पिरी तिरुपति, जिसे हम ‘देवजी’ या ‘देवन्ना’ के नाम से जानते हैं।
‘देवजी’ कोई सामान्य अपराधी नहीं, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक ‘सिरदर्द’ है। 64 साल का यह नक्सली, तेलंगाना के करीमनगर जिले का रहने वाला है। वह लंबे समय से नक्सल संगठन में सक्रिय है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि ‘देवजी’ का नक्सल गतिविधियों में एक लंबा और खूनी इतिहास रहा है। उसने कई अहम पदों पर काम किया है, जिससे उसकी पहुंच और प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। वर्तमान में वह पोलित ब्यूरो का सदस्य है, जो संगठन के भीतर सबसे ताकतवर पदों में से एक है। इसके साथ ही, नक्सलियों की मिलिट्री इंटेलिजेंस विंग की कमान भी उसके पास थी। इसका मतलब है कि वह न सिर्फ रणनीतिकार है, बल्कि खुफिया जानकारी जुटाने और सैन्य हमलों की योजना बनाने में भी माहिर है।
‘देवजी’ की भूमिका सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही है। साउथ इंडिया में नक्सल गतिविधियों को फैलाने में उसकी अहम भूमिका रही है। गोवा से लेकर केरल और फिर बंगाल तक, उसने कई बड़े आंदोलनों और हमलों का नेतृत्व किया है। उसकी क्रूर रणनीतियों ने उसे नक्सलियों के बीच एक खूंखार नेता बना दिया है। वह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि हिंसा और आतंक का पर्याय बन चुका है।
‘देवजी’ को न सिर्फ संगठन में शीर्ष जिम्मेदारियों के लिए जाना जाता है, बल्कि उसे एक ऐसा नेता माना जाता है जो बेहद तेजी से और निर्णायक फैसले लेने के लिए मशहूर है। ये खूबी उसे और भी खतरनाक बनाती है, क्योंकि इससे सुरक्षा बलों को उसकी अगली चाल का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है।
‘देवजी’ के नेतृत्व में कई बड़े और घातक हमले हुए हैं, जिन्होंने देश को झकझोर कर रख दिया था। क्या आपको याद है 2003 में आंध्र प्रदेश में बड़े बम विस्फोट की साजिश? उसके पीछे ‘देवजी’ का दिमाग था। फिर 2007 का रानीबोदली हमला, जिसमें 55 जवान शहीद हुए थे, उसका मास्टरमाइंड भी यही ‘देवजी’ था। और कौन भूल सकता है 2010 का दंतेवाड़ा हमला, जब 76 सीआरपीएफ जवानों की निर्मम हत्या कर दी गई थी? इन सभी हमलों में ‘देवजी’ की रणनीतिक क्षमता और क्रूरता स्पष्ट रूप से देखी गई थी।
उसकी रणनीति में जवानों को जंगल में घेरकर अचानक हमला करना शामिल है। वह गुरिल्ला युद्ध में माहिर है। उसने अपने संगठन को मजबूत करने के लिए स्थानीय आदिवासियों को भर्ती किया और उन्हें हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी। यह एक ऐसा दुष्चक्र है, जिसमें मासूम आदिवासियों को अपने ही देश के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है।
सरकार ने इस खूंखार नक्सली पर 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का इनाम घोषित कर रखा है। ये राशि उसकी खतरनाक पहचान और उसे पकड़ने की urgency को बताती है। लेकिन इतने बड़े इनाम के बावजूद, वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की पहुंच से दूर रहा है।
अब जब ‘देवजी’ को नया महासचिव नियुक्त किया गया है, तो सुरक्षा एजेंसियां और खुफिया विभाग पूरी तरह से अलर्ट हो गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि उसकी नई रणनीति से नक्सली संगठन एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश करेगा। वह नए कैडर की भर्ती कर सकता है, नए हमलों की योजना बना सकता है और देश के आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।




