‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ पुस्तक का विमोचन, लेखकों ने अत्यंत गंभीर और व्यापक शोध किया
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने पुस्तक को बताया वर्षों की मेहनत का परिणाम

AINS NEWS… नक्सलवाद का दंश झेलते-झेलते बस्तर चार दशकों तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहा, लेकिन अब नक्सलवाद की समाप्ति के साथ केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से बस्तर को देश का सबसे सुंदर और विकसित आदिवासी संभाग बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर में आयोजित ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ पुस्तक के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. शशांक शर्मा, पांचजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर सहित अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास की दौड़ में काफी पीछे रह गया था। अब परिस्थितियां बदल रही हैं और एक नए, विकसित तथा समृद्ध बस्तर के निर्माण का अवसर प्राप्त हुआ है। राज्य सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है, जिनसे आमजन को मूलभूत सुविधाओं सहित सभी आवश्यक सेवाएं सहज रूप से उपलब्ध हो सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री राजीव रंजन प्रसाद और सुश्री रचना नायडू ने यह पुस्तक ऐसे समय में लिखी है, जब माओवाद की समाप्ति हो चुकी है। इस दृष्टि से यह पुस्तक और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। समय के साथ स्मृतियां धुंधली हो जाती हैं और घाव भरने लगते हैं। ऐसे में आवश्यक है कि माओवाद के कठिन दौर और उससे मुक्ति के संघर्ष को दस्तावेज़ी रूप में सुरक्षित रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उससे सीख सकें।
उन्होंने कहा कि जब भावी पीढ़ियां इस विषय पर लिखी पुस्तकों को पढ़ेंगी, तब उन्हें यह समझने का अवसर मिलेगा कि माओवाद से मुक्ति के लिए समाज और सुरक्षा बलों ने कितना कठिन संघर्ष किया तथा कितने जवानों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। यह पुस्तक उन्हें यह भी बताएगी कि हिंसा किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकती और लोगों का विश्वास केवल संविधान एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर ही जीता जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि लेखकों ने अत्यंत गंभीर और व्यापक शोध किया है। उन्होंने बस्तर समाज के विभिन्न वर्गों, आत्मसमर्पित नक्सलियों तथा नक्सलवाद को निकट से देखने और झेलने वाले लोगों से संवाद कर महत्वपूर्ण तथ्यों का संकलन किया है। पुस्तक यह उजागर करती है कि किस प्रकार माओवादी नेतृत्व ने अपने कैडर का विस्तार किया और अनेक परिवारों पर संगठन में सदस्य भेजने का दबाव बनाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लेखकों ने अपने शोध में जिन पूर्व नक्सलियों से बातचीत की, उनमें लगभग 80 प्रतिशत लोग अशिक्षित या केवल पांचवीं कक्षा तक शिक्षित पाए गए। जिस आयु में उनके हाथों में कलम होनी चाहिए थी, उस आयु में उन्हें हथियार थमा दिए गए। माओवाद ने एक पूरी पीढ़ी को शिक्षा से वंचित रखा, उन्हें परिवार और समाज से दूर कर दिया। उन्होंने कहा कि श्री राजीव रंजन प्रसाद ने बस्तर पर पहले भी कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें माओवाद का वास्तविक चेहरा उजागर करने के साथ-साथ बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति का भी प्रभावी चित्रण किया गया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अब बस्तर के नवनिर्माण का समय है। राज्य सरकार ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ के माध्यम से योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। नियद नेल्ला नार योजना और बस्तर मुन्ने अभियान के जरिए शासकीय योजनाओं का लाभ सैचुरेशन मोड में लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। जहां पहले सुरक्षा कैंप स्थापित थे, वहां अब सेवा डेरे विकसित किए जा रहे हैं, जो शासकीय सेवाओं, कौशल विकास और उद्यमिता के केंद्र बनेंगे।
*विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने पुस्तक को बताया वर्षों की मेहनत का परिणाम*
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ पुस्तक वर्षों की मेहनत और गहन अध्ययन का परिणाम है। यह पुस्तक किसी वातानुकूलित कक्ष में बैठकर नहीं लिखी गई, बल्कि बस्तर के दूरस्थ जंगलों तक पहुंचकर, आत्मसमर्पित नक्सलियों से संवाद कर और जमीनी वास्तविकताओं को समझकर तैयार की गई है।
*उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा – माओवाद पेट से नहीं, दिमाग से आया था*
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि माओवाद किसी आर्थिक आवश्यकता से नहीं, बल्कि एक विचारधारा के रूप में आया था। इसका उद्देश्य बंदूक की नली के बल पर सत्ता स्थापित करना था। उन्होंने कहा कि आज वे बंदूकें वापस रखवाई जा चुकी हैं और समाज सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।
इस दौरान उन्होंने बाबा नागार्जुन की कविता का उल्लेख भी किया। श्री शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद के समाप्त होने के बाद बस्तर में मेलों, मड़इयों और साप्ताहिक बाजारों में फिर से रौनक लौट आई है। देवगुड़ियों में पूजा-पाठ पुनः प्रारंभ हो गया है। राज्य सरकार आत्मसमर्पित नक्सलियों और प्रभावित परिवारों के लिए बेहतर पुनर्वास व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है तथा इसके लिए पुनर्वास केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। उन्होंने भी पुस्तक के लेखक श्री राजीव रंजन प्रसाद एवं सुश्री रचना नायडू को बधाई और शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम में साहित्य, मीडिया, समाज सेवा एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित थे।



