सरकार के द्वारा पेश आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े यह बताते हैं कि प्रदेश पर कर्ज का बोझ बढ़ा है : माकपा
चुनावी बजट लेकिन जनआकांक्षा की अभिव्यक्ति में असफल

AINS RAIPUR…मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने प्रदेश सरकार द्वारा पेश किए बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जन आकांक्षा की अभिव्यक्ति में असफल रहा यह बजट।
पार्टी की राज्य समिति की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सरकार का जी डी पी विकास दर 12.6% का अनुमान तथा प्रतिव्यक्ति आय में लगभग 11% वृद्धि का दावा जरूर है किंतु स्वयं सरकार के द्वारा पेश आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े यह बताते हैं कि प्रदेश पर कर्ज का बोझ बढ़ा है, आय असमानता बढ़ीं है और प्रदेश की 73% आबादी अभी भी गरीबी रेखा सीमा से नीचे जीवन यापन करने बाध्य है । इसके लिए रोजगार के अवसर तथा आम लोगों की आमदनी में वृद्धि के पर्याप्त उपाय की आवश्यकता है ।

पार्टी ने कहा कि सरकार ने बेरोजगारी भत्ते की बात तो को किंतु उसके लिए परिवार की आमदनी के लिए 2.50 लाख की सीमा लगा दी और वह भी अधिकतम दो वर्ष के लिए 2500 रुपए प्रतिमाह की शर्त जोड़ दी इससे बड़ी संख्या में पात्र इससे वंचित हो जायेंगे, जबकि सरकार के आंकड़े यह बताते हैं कि 19 लाख से अधिक केवल पंजीकृत बेरोजगार हैं ।
इसी तरह निराश्रित बुजुर्ग, दिव्यांग, विधवा, परित्यकता की मासिक पेंशन में मात्र 150 रुपए, मध्यान्ह भोजन के रसोइए के मानदेय में मात्र 300 रुपए, स्कूल सफाई कर्मियों के मानदेय में मात्र 300 रुपए की मासिक वृद्धि की गई है जबकि मध्यान्ह भोजन कर्मियों के मामले में छत्तीसगढ उच्च न्यायालय ने उन्हे प्रतिदिन 392/ पारिश्रमिक दिए जाने का निर्णय दिया है । इसी तरह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका तथा मिनी आंगनवाड़ी में काम करने वाली सहायिकाएं जो लंबे समय से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं उनके मानदेय में जरूर कुछ वृद्धि की गई है किंतु सरकार ने अपने खुद के चुनाव घोषणा पत्र में इन्हे कलेक्टर दर पर पारिश्रमिक दिए जाने के वादे को लागू नहीं किया जबकि ये कर्मी कम से कम चुनाव वर्ष में सरकार के इस वादे पर अमल की उम्मीद किए थे । इसी तरह मितानिन को जो अतिरिक्त राशि की घोषणा की गई है वह भी अर्पयप्त है ।
पार्टी ने कहा कि सरकार ने अपने बजट में 15.06% पूंजीगत व्यय और ढांचागत क्षेत्र के लिए निवेश की घोषणा तो जरूर की है किंतु प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना में और निवेश, किसानों के उपज के खरीद के जो आंकड़े दिए गए बावजूद इसके हर किसान का एक एक दाना खरीदी के अपने वादे को वह पूर्ण नहीं कर पाई है, किसानों के अन्य उपज के लिए खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास , मनरेगा की योजना की दयनीय स्थिति और शहरी क्षेत्र के गरीबों के लिए रोजगार गारंटी जैसी योजना प्रारंभ करने के जरिए नए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने उसके जरिए जनता की क्रय शक्ति बढाने और अंततः उससे बाजार में मांग में वृद्धि से उत्पादन में वृद्धि और आर्थिक जगत के चक्र को विकसित करने के अपने इस अंतिम अवसर को भी इस सरकार ने एक तरह से खो दिया ।




