छत्तीसगढ़

घरवाले कर चुके थे क्रियाकर्म,  पत्नी का भी कर दिया गया था अन्य व्यक्ति से विवाह, फिर पहुँच गया लापता इंसान

शांति फाउंडेशन के सेवा कार्य से संजय पासवान दस साल के बाद लौटे अपने परिवार उत्तर प्रदेश

 AINS BASTAR (K.SHASHIDHARAN) संजय पासवान की स्टोरी कोई फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है संजय पासवान का जीवन बहुत ही समांतर चल रहा था, परिवार की आर्थिक स्थिति कोई बहुत अच्छी नहीं थी पर कार्य करके सभी परिवार खुशी से अपने जीवन बिताया करते थे, संजय पासवान की शादी के बाद उसकी एक बच्ची भी थी।

संजय पासवान शांति फाउंडेशन को कोरोना काल के प्रथम लहर के समय बहुत ही गंभीर स्थिति में सड़कों पर मिले थे, जिसे शांति फाउंडेशन के द्वारा भोजन की अत्याधिक जरूरत वाले व्यक्ति की सूची पर रखकर यतिंद्र सलाम की घर के कांप्लेक्स के बरांडे में रखकर उसे हर रोज भोजन देने का कार्य किया गया।
क्योंकि उस वक्त शांति फाउंडेशन का पुनर्वास केंद्र संचालित नहीं किया गया था और समय उस वक्त का था जब इंसान इंसान से डरना चालू कर चुका था, कोरोना का प्रथम लहर और पूरे मानव संसार में एक अजीब सा दहशत का माहौल चल रहा था।

संजय सालों से नहाए हुए नहीं थे, मोहल्ले वासियों के द्वारा संजय को उस मोहल्ले में रखने का विरोध करने लगे, तो उसे यतींद्र सलाम के घर के सामने रखा गया। माहौल करोना का था पर भी संजय को नया जीवन देने के लिए शांति फाउंडेशन ने अपने से जो हो सका वाह कार्य निरंतर करते रहे, उस समय पुनर्वास केन्द्र नहीं था पर संजय जैसे और भी मानसिक बीमारी से परेशान लोग जो सड़कों पर थे, शांति फाउंडेशन के द्वारा किसी को भी भूखे सोने नहीं दिया गया, यहां तक बेजुबान जानवरों का भी पूरा ख्याल रखा गया।
संजय 2019 मे निरंतर संस्था के साथ ही है और आज संजय पूर्ण रूप से ठीक होकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए तैयार है। संजय ने जब अपनी जानकारी संस्था के सामने रखी अपने परिवार व गांव का नाम संस्था के सामने रखा जिसमें उसने बताया उत्तर प्रदेश के
गाजीपुर जिला के ग्राम सीहोली का होना, तो संस्था ने तत्काल गाजीपुर थाना के कंट्रोल रूम में फोन कर जानकारी बताया गया तो तत्काल कंट्रोल रूम के द्वारा सीहोली गांव जानकारी भेजा गया जिससे संजय के परिवार की जानकारी व संजय की गुमशुदगी का रिपोर्ट आज से 10 साल पहले का बताया गया।
जिससे यह तो साफ था कि परिवार अब मिल चुका है, जब वीडियो कॉलिंग के माध्यम से संजय की मां से उनका बात कराई गयी तो उनकी मां अपने आंसू रोक ना सके और कहा बेटा पूरे 10 साल लग गए तुझे ढूंढते ढूंढते। परिवार ने संस्था को जानकारी दिया की संजय नहीं है सोच कर हम लोगों ने संजय का क्रियाकर्म कर चुके थे व इसकी धर्मपत्नी का चूड़ी तोड़कर अन्य व्यक्ति के साथ विवाह भी कर चुके हैं।
(आप लोगों का धन्यवाद हम लोग किस मुंह से करें कि मेरा खोया हुआ बेटा 10 साल के बाद आज फिर मुझे मिल गया)

यह दुर्भाग्य की बात है की संजय की पत्नी का जिस व्यक्ति से विवाह किया गया था वह अब इस दुनिया में नहीं है ।  हम लोग संजय के घर आने से पहले उसकी पत्नी को अपने घर वापस ले आएंगे ताकि संजय को इस चीज का दुख ना हो की उसकी पत्नी की शादी उसके गैर हाजरी में किसी अन्य व्यक्ति के साथ हुई थी, यह बात हमेशा के लिए दफन हो जाएगी।
संजय के भाई अवधेश पासवान
दंतेवाड़ा में पदस्थ सीएफ का जवान मुरारी पासी जिसे यह पता चला की हमारे गांव के 10 साल पहले बिछड़े हुए संजय जी मिल गये है तो उन्होंने अपनी नौकरी से छुट्टी लेकर उनके भाई के साथ उसे उत्तर प्रदेश छोड़ने निकल गये।
संजय के भाई अवधेश पासवान ने संजय की जानकारी देते हुए बताया की संजय शुरू से ही सरल स्वभाव का व्यक्ति है, यह गांव के गरीब बच्चों को भी फ्री में ट्यूशन पढ़ाया करता था ताकि वह लोग पढ़ाई कर ले। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी संजय कमाई के लिए दिल्ली एक कपड़े के फैक्ट्री में चले गए वहां का काम कुछ साल करने के बाद परिवार ने संजय का शादी कर दिया शादी की वजह से संजय वापस गांव में ही रहने लगे वहां राज मिस्त्री लोगों के साथ घर बनाने जैसे कार्य करने लगे ।  घर परिवार सब सही चल रहा था पर वक्त को कुछ और ही मंजूर था एक रोज संजय के घर में एक खूबसूरत सी बेटी ने जन्म लिया संजय काफी खुश था परिवार के भरण-पोषण के लिए और अधिक कार्य कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था बच्ची के जन्म की एक डेढ़ साल के बाद अचानक संजय डिप्रेशन में जाने लगे और उन्होंने अपना मानसिक आपा खोकर अचानक गांव से गायब हो गये
संजय उत्तर प्रदेश से कैसे बस्तर पहुंच गये यह तो उसे याद नहीं पर उसके कहे अनुसार वह पैदल ही दिन रात चलकर यहां तक पहुंच गया था संजय को जब इलाज के बाद अपने परिवार का याद आया और अपने परिवार में मां बाप पत्नी और बच्ची को याद करने के साथ-साथ उसे 10 साल पहले का एक मोबाइल नंबर भी याद था उस मोबाइल नंबर पर फोन करने पर उत्तर प्रदेश का ही जिला गाजीपुर का एक व्यक्ति उस फोन को उठाया और उन्होंने संजय नाम के किसी भी व्यक्ति को जानने से साफ इनकार कर दिया उन्होंने बताया हो सकता है यह नंबर कभी उनका रहा होगा पर आज यह सालों से मेरा नंबर है संजय का घर पता करने में शांति फाउंडेशन को एक बहुत बड़ी सफलता तो मिली साथ में एक सीख भी मिला कि सालों से भटक रहे यह व्यक्ति आज जब अपने परिवार में जाएंगे इससे बड़ी खुशी इससे बड़ी सफलता इस दुनिया में और कुछ भी नहीं हो सकता शांति फाउंडेशन ने इस कार्य को पूरे छत्तीसगढ़ में और भविष्य में पूरे इंडिया में लोगों के लिए और ज्यादा सहयोग करने व लोगों को सहयोग पहुंचाने का निर्णय लिया है।

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