1,000 करोड़ घोटाले के आरोपी अधिकारी को फिर से एक नये आयोग की ज़िम्मेदारी, जनमानस पर शासन के प्रति विपरीत धारणा
पूर्व मुख्य सचिवों के दोनों हाथों में लड्डू, छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद से यह सिलसिला जारी

AINS RAIPUR…कांग्रेस सरकार हो या पूर्ववर्ती भाजपा सरकार, पूर्व मुख्य सचिवों को संवैधानिक पदों में बिठाने की ज़ोरदार कोशिश हो रही है। ये मुख्य सचिव अपने कार्यकाल में उल्टे -सीधे कार्य करने के लिए प्रसिद्ध रहे हैं और इन पर समय -समय पर बड़े पैमाने में भष्ट्राचार के आरोप लगे हैं। कईयों के ख़िलाफ़ सी.बी.आई. जाँच भी चल रही है, कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट से स्थगन लेकर मौज की ज़िंदगी जी रहे है।इनके दोनों हाथों में लड्डू है, नये छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद से यह सिलसिला जारी है।

उदाहरण के तौर पर विवेक कुमार ढांड को लीजिए, भाजपा सरकार के समय 1 माह पूर्व रिटायरमेंट लेकर वर्ष 2018 में रेरा के संवैधानिक पद में बैठ गये। कांग्रेस सरकार में शानदार 4 साल रहे। इस बीच शानदार भ्रष्टाचार का रिकार्ड बनाते रहे। कलोनाइज़र का काम हो या फ़्री होल्ड का मामला हो,खूब पैसा बटोरा है।अब उन्हें नवाचार आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। 1,000 करोड़ घोटाला में संलिप्त आरोपी अधिकारी को फिर से एक नये आयोग की ज़िम्मेदारी देना ,अन्य प्रतिभाशाली व ईमानदार प्रशासनिक अधिकारी का हक छिनने जैसा है। इस आयोग में आने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यों में सीधा हस्तक्षेप व दखल होगा। वे अपने भ्रष्टाचार का नया सोपान गढ़ेंगे । इस नियुक्ति से जनमानस पर शासन के प्रति विपरीत धारणा बनी है। लोग कहने लगे हैं कि सरकार घोटाले बाजों अधिकारियों व नेताओं को आयोग या प्राधिकरण या बोर्ड में बिठा रही है।

विवेक कुमार ढांड के विरूद्ध शासकीय भूमि को फ्री -होल्ड करा लेने का मामला है, जिसमें 300 करोड़ के अधिक की सम्पत्ति को मात्र 1.12 करोड़ में फ्री -होल्ड कराकर अपने व अपने परिवार के नाम दर्ज करा लिए हैं, जिसकी जाँच भी केंद्रीय जाँच एजेंसी व राजस्व मंडल के पास लम्बित है। जाँच को अपने नज़दीक आते देख सरकार से नज़दीकी बढ़ाकर अनुचित लाभ लेने के लिये नया नवाचार आयोग गठन कराकर स्वयं अध्यक्ष बनकर बैठ गये है। ये संस्था को एक व्यापार की तरह चलाने में माहिर है। इसीलिये नये नये व महत्वपूर्ण पद लेने में जगज़ाहिर है। अभी इनको प्रवर्तन निदेशालय व सी.बी.आई. ने नहीं पकड़ा है, लेकिन आने वाले समय में जरूर कार्यवाही होगी। पूर्व मुख्य सचिव में डी.एस.मिश्रा, सुनील कुजुर, सरजियम मिंज, आर.पी.मंडल आज भी लाभकारी आयोग / प्राधिकरण में पदस्थ हैं। छत्तीसगढ़ में सेवानिवृत्त आई.ए .एस. अधिकारी , संविदा पद लेने के लिए इतना आतुर क्यों रहते हैं ? क्योंकि सरकार की विशेष दखल नहीं होने से निरंकुश शासन कर सके व स्वयं अनैतिक लाभ ले सकें। डी.डी.सिंह जैसे भ्रष्ट अधिकारी कई सालों से सामान्य प्रशासन विभाग व आदिम जाति विभाग, सहकारिता विभाग सम्भालते रहे हैं। इनके कारनामों को सार्वजनिक किया जाय,तो ये सलाख़ों के पीछे रहेंगें। सरकार को बदनाम करने में इनका बहुत बढ़ा योगदान रहा है। ये विवेक कुमार के खास गुर्गे है, इन्हें शासन में मुख्यमंत्री सचिवालय में सेवा निवृत्ति के बाद सचिव पद दिया गया है। विवेक कुमार के निकट में अनिल टूटेजा ,मुख्यमंत्री सचिवालय की उपसचिव सौम्या चौरसिया, सुनील कुजुर सहकारिता आयोग प्रमुख, एम .के .राउत पूर्व मुख्य सचिव,आर .पी.मंडल,नया रायपुर विकास प्राधिकरण अध्यक्ष, अतिरिक्त मुख्य सचिव सुब्रत साहू आदि प्रमुख हैं। निरंकुश प्रशासनिक अधिकारियों का जमावड़ा छत्तीसगढ़ में हो गया है,इसे केंद्रीय जाँच एजेंसी ही ठीक कर सकती है।




