छत्तीसगढ़

बरामदे में बैठकर पढ़ने को मजबूर बच्चे, आंगनबाड़ी केंद्र के भवन में अध्ययन कराना खतरों से खाली नहीं

भवन की हालत जर्जर , जान जोखिम उठाकर पड़ रहे बच्चे

AINS NEWS 24×7……रायगढ़ जिले के वनांचल क्षेत्र धरमजयगढ विकासखण्ड में अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों का हालात काफी जर्जर हो चुकी है, कहीं भवन के छत के प्लास्टर टूट कर गिर रहे हैं,तो कई आंगनबाड़ी केंद्र की दिवार धंस रही है, तो कहीं का आंगनबाड़ी केंद्र भवन भूत बंगला बनकर रह गया है!

ऐसा ही एक मामला है, जहां पर आंगनबाड़ी केंद्र भवन की जर्जर हालत हो चुकी है। जिसमें प्रवेश करना यानि कभी भी अनहोनी का निमंत्रण देना है।
हम बात कर रहे हैं, धरमजयगढ विकासखण्ड के महिला एवं बाल विकास परियोजना कापू क्षेत्र के गोढ़ी खुर्द में बने आंगनबाड़ी केंद्र का जहां पर भवन की हालात जर्जर हो चुकी है।

भवन में अध्ययन कराना खतरों से खाली नहीं है और वहीं जर्जर भवन के कारण आंगनबाड़ी कार्यकर्ता यारमोती राठिया द्वारा गांव के ही घर बरामदे को मांग कर आंगनबाड़ी केंद्र संचालित कर रही है! जहां पर कई तरह के परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का भी गांवों सन्नाटा पसरा हुआ है,कभी भूल से भी गांव में निरीक्षण करने लोगों का हालचाल पूछने तक नहीं पहुंचते, ग्रामीणों का कहना है, चुनाव के समय में जनप्रतिनिधियों द्वारा हमारे आंगन में इतने बार पधारते हैं, कि उनके आने पर हमारे काम धंधा चौपट कर जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद उनके दर्शन दुर्लभ हो गई है। और आगे उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र भवन का हालात काफी लम्बे समय जर्जर हो चुकी है। इस संबंध में ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान से जानकारी ली गई,तो उन्होंने कहा कि “हमारे द्वारा कई बार विभागीय अधिकारीयों को सुचना दी है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई!” लेकिन साफ शब्दों में कहें तो आंगनबाड़ी केंद्रों का सुध लेने वाले विभागीय कर्मचारी हों चाहे या फिर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि सभी अपने जिम्मेदारियों से भागते नजर आ रहे हैं! और वहीं सवाल उठता है, कि आखिरकार विकसित ग्राम पंचायतों में आंगनबाड़ी केंद्रों भवनों का ऐसी दुर्दशा क्यों? महिला एवं बाल विकास परियोजना आला-अधिकारी कर्मचारी समय समय-समय पर निरीक्षण क्यों नहीं करते! और मासूम बच्चों स्वास्थ्य, शिक्षा पर कोई ध्यान क्यों नहीं!

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