बस्तर

नक्सलगढ़ में भ्रष्टाचार की नेलसनार मिरतुल गंगालूर सड़क बनी पत्रकार के मौत का कारण

54 करोड़ की सड़क पर 120करोड़ का हुआ था खेल

◆ 2-2 किलोमीटर के 17 भाग कर रहा था आरोपी ठेकेदार सुरेश

AINS NEWS दंतेवाड़ा… पत्रकार मुकेश चन्द्राकर की मौत कोई आम मौत नही यह मौत सच की आवाज़ दबाकर लोकतंत्र का गला घोटने की साजिश है. बस्तर के पत्रकार नक्सलियों के गढ़ में बम-बारूद के बीच चलकर सुरक्षित पहुँच जाते हैं। मगर भ्रष्टाचार की खबर लिखकर पत्रकार सुरक्षित नही है. आज एक कलम के सिपाही मुकेश चंद्राकर की आवाज इसलिए खामोश करके सपेट्रिक टैंक में बन्द करके क्रांकीट से दबा दी गयी क्योकि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहेथे। नेलसनार से मिरतुल गंगालूर सड़क जिसे नक्सलियों का गढ़ बताकर पत्रकार मुकेश की हत्या के आरोपी ठेकेदार सुरेश चन्द्राकर 2-2किलोमीटर के कुल 17 हिस्से मतलब कुल 34 किलोमीटर की सड़क बना रहा था. और इस सड़क में पीडब्ल्यूडी विभाग की साठगांठ से ठेकेदार ने 56 करोड़ की सड़क को आइटम वर्क पर रिनोवल करवाकर लगभग 62% एबब करके 120 करोड़ करवा लिया. फिर यहाँ से शुरू हुआ भ्रष्टाचार का ऐसा खूनी खेल जिस पर जवांनो और पत्रकार की शहादत का खून भी मिला लिया गया.

महज 4 पार्ट कंप्लीट है और पैसा 90% प्रतिशत बाहर

आपको जानकर हैरानी होगी कि आरोपी ठेकेदार सुरेश चन्द्राकर की विभागीय साठगांठ ऐसी थी कि अभी इस सड़क में मात्र 4 पार्ट मतलब 8 किलोमीटर की सड़क पूर्ण और शेष 26 किलोमीटर की सड़क अधूरी है. पर ठेकेदार ने साठगांठ कर 90% राशि बीजापुर पीडब्लूडी के इस सड़क के सबइंजीनियर, एसडीओ और उच्च अधिकारियों के संरक्षण से निकाल लिया है. जिस भ्रष्टाचार को दबाने के लिये आरोपी ठेकेदार सुरेश चन्द्राकर के भाई रितेश चन्द्राकर और उसके साथियों मिलकर पत्रकार मुकेश की निर्मम हत्या कुल्हाड़ियों से काटकर कर दी. क्योकि अगर यह भ्रष्टाचार निकल गया तो इसमें ठेकेदार सुरेश चन्द्राकर के साथ विभागीय अधिकारियो की नौकरी भी खतरे में पड़ सकती थी. यह भी

कल तक जो SPO था आखिर वह आज अकूत धन का मालिक कैसे बन गया

ठेकेदार सुरेश चन्द्राकर सलवा जुडूम में बीजापुर पुलिस विभाग में साल 2010तक SPO था. जिसके बाद उसने नौकरी छोड़कर ठेकेदारी का धंधा शुरू किया. मात्र 10 वर्षो में सुरेश चन्द्राकर नक्सलगढ़ में भ्रष्टाचार की ऐसी फसल उगाई की वह देखते देखते अरबो की सम्प्पति का मालिक ब न गया.अब तो सुरेश चन्द्राकर को सरकारी जवान उसकी रक्षा के लिये सरकार दे रखी है. इस धनबल के दम पर उसके भ्रष्टाचार के खिलाफ ही बीजापुर जिले का इकलौता पत्रकार मुकेश चंद्राकर ने आवाज़ उठाई थी. जिसके साहस को भ्रष्टाचारियों ने मिलकर सेप्टिक टैंक में दफन कर दिया था.

 

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