राज्य के कुछ बड़े नौकरशाहों, ताक़तवर राजनेताओं और आबकारी विभाग के अधिकारियों ने मिलकर बनाया एक सिंडिकेट, सरकार को हुआ 2,161 करोड़ के राजस्व का नुक़सान
काले धन का इस्तेमाल चैतन्य की कंपनी, बघेल डेवलपर्स के माध्यम से किया गया- ED

AINS NEWS… शुक्रवार, 18 जुलाई, 2025 का दिन बघेल परिवार के लिए मुसीबतों का पहाड़ लेकर आया। प्रवर्तन निदेशालय, यानी ED ने 2,161 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में चैतन्य बघेल को गिरफ़्तार कर लिया। इसके तुरंत बाद, उन्हें रायपुर की स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से अदालत ने उन्हें पाँच दिनों के लिए ED की हिरासत में भेज दिया है।

ये गिरफ़्तारी अचानक नहीं हुई है। इसकी पटकथा कई महीनों से लिखी जा रही थी। कुछ महीने पहले ही ED ने इसी घोटाले की जाँच के सिलसिले में भिलाई में भूपेश बघेल के घर सहित 14 ठिकानों पर छापेमारी की थी।
आख़िर ये पूरा मामला है क्या? ये शराब घोटाला कैसे हुआ? चैतन्य बघेल पर ED के क्या आरोप हैं? और इस पर बघेल परिवार और कांग्रेस का क्या कहना है?
ED के दावों के अनुसार, ये कथित शराब घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी। आरोप है कि राज्य के कुछ बड़े नौकरशाहों, ताक़तवर राजनेताओं और आबकारी विभाग के अधिकारियों ने मिलकर एक सिंडिकेट बनाया। इस सिंडिकेट ने एक तरह से सरकार के समानांतर, यानी एक “पैरेलल” आबकारी सिस्टम खड़ा कर दिया था।
आरोप है कि ये सिंडिकेट राज्य में शराब तो बिकवाता था, लेकिन उससे होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा सरकारी ख़ज़ाने में जमा ही नहीं होता था। ये पैसा सीधे इस सिंडिकेट की जेबों में जा रहा था। इस पूरे खेल से छत्तीसगढ़ सरकार को 2,161 करोड़ के भारी-भरकम राजस्व का नुक़सान हुआ। सोचिए, जनता की गाढ़ी कमाई का कितना बड़ा पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया!
जब छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध शाखा, यानी EOW/ACB ने एक FIR दर्ज की। इसी FIR को आधार बनाकर ED ने अप्रैल 2024 में अपना केस दर्ज किया, जिसे ECIR यानी एनफ़ोर्समेंट केस इन्फ़ॉर्मेशन रिपोर्ट कहते हैं।
कवासी लखमा, अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा, अरुण पति त्रिपाठी इन सभी को पहले ही गिरफ़्तार किया जा चुका है। लेकिन यहाँ एक दिलचस्प बात ये है कि इस घोटाले की FIR में न तो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम था और न ही उनके बेटे चैतन्य बघेल का। फिर चैतन्य तक ED कैसे पहुँची? ED को शक था कि इस घोटाले के तार बघेल परिवार से जुड़े हो सकते हैं। इसी शक की बिनाह पर, इसी साल मार्च 2024 में ED ने पहली बार दुर्ग के भिलाई शहर में स्थित भूपेश बघेल के घर पर छापा मारा था, और अब, महीनों की जाँच के बाद, ED ने चैतन्य को गिरफ़्तार कर लिया है।

ED ने चैतन्य बघेल को किन सबूतों और बयानों के आधार पर गिरफ़्तार किया है?
ED के अनुसार, इस केस के एक और आरोपी, लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ़ पप्पू बंसल के बयान ने चैतन्य की मुश्किलें बढ़ा दीं। पप्पू बंसल ने अपने बयान में ED को बताया कि उसने चैतन्य बघेल के साथ मिलकर शराब घोटाले से कमाए गए 1,000 करोड़ से ज़्यादा की नक़दी का लेन-देन किया था। पप्पू बंसल ने पूरी चेन का ख़ुलासा करते हुए दावा किया कि वो घोटाले के मास्टरमाइंड अनवर ढेबर से दीपेन चावड़ा नाम के एक शख़्स के ज़रिए पैसे लेता था, और फिर उस पैसे को चैतन्य के साथ मिलकर कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष राम गोपाल अग्रवाल को पहुँचाता था। इतना ही नहीं, बंसल ने ये भी दावा किया कि उसने चैतन्य के कहने पर के.के. श्रीवास्तव नाम के एक व्यक्ति को 80 से 100 करोड़ रुपये दिए थे।
ED का दावा है कि घोटाले से कमाए गए इस काले धन का इस्तेमाल चैतन्य की कंपनी, बघेल डेवलपर्स के माध्यम से किया गया। इस पैसे को उनके “विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट” के निर्माण में लगाया गया। इस प्रोजेक्ट से जुड़े एक गवाह ने ED को बताया कि प्रोजेक्ट की लागत को कागज़ों पर बहुत कम, सिर्फ़ 7.14 करोड़ रुपये दिखाया गया, जबकि इसकी असली लागत 13 से 15 करोड़ रुपये थी। ED का मानना है कि बाक़ी का पैसा घोटाले का ही था, जिसे सफ़ेद करने की कोशिश की गई।
मामले के एक और आरोपी, त्रिलोक सिंह ढिल्लों ने अपने कर्मचारियों के लिए 19 फ़्लैट ख़रीदने के लिए बघेल डेवलपर्स को 5 करोड़ रुपये का भुगतान किया।ED ने एक और कड़ी जोड़ते हुए आरोप लगाया है कि एक ज्वेलरी कंपनी, जिसने चैतन्य को 4.5 करोड़ रुपये का लोन दिया था, उसी कंपनी ने बघेल डेवलपर्स से 80 लाख रुपये के छह प्लॉट भी ख़रीदे। ED को शक है कि ये सब लेन-देन असल में नक़द में हुए भुगतान को एडजस्ट करने का एक तरीक़ा था, जो कि अपराध की कमाई के अलावा और कुछ नहीं है। इन सभी आरोपों को जोड़कर ED ने दावा किया है कि चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से सीधे तौर पर 16.7 करोड़ मिले हैं।
चैतन्य के वकील फ़ैसल रिज़वी ने अदालत में दलील दी कि ये मामला 2022 से चल रहा है और ED अब तक चार चार्जशीट दाख़िल कर चुकी है, लेकिन उनमें से किसी में भी चैतन्य का नाम नहीं था। उन्होंने कहा कि चैतन्य के घर पर 10 मार्च को छापा ज़रूर पड़ा, लेकिन उसके बाद उन्हें पूछताछ के लिए एक बार भी समन नहीं भेजा गया और सीधे गिरफ़्तार कर लिया गया। वकील का सबसे बड़ा तर्क ये है कि चैतन्य की गिरफ़्तारी सिर्फ़ और सिर्फ़ पप्पू बंसल के बयान पर आधारित है, जिसके ख़ुद के ख़िलाफ़ मई में ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी हो चुका है। वकील ने सवाल उठाया कि क्या पप्पू बंसल का ये बयान किसी दबाव में लिया गया है?
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे एक राजनीतिक साज़िश क़रार दिया। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को बिना किसी नोटिस या पूछताछ के गिरफ़्तार किया गया है। भूपेश बघेल ने इस गिरफ़्तारी को सीधे तौर पर अडानी की एक कोयला खदान परियोजना से जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि चूँकि उन्होंने और उनकी पार्टी ने रायगढ़ ज़िले में पेड़ों की कटाई का मुद्दा उठाया था, इसलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। बघेल ने आरोप लगाया कि अडानी के लोगों ने वन अधिकारियों की मौजूदगी में रातों-रात 5,000 पेड़ काट दिए और जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो बदले में उनके बेटे पर कार्रवाई की गई।
भूपेश बघेल ने जाँच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस पप्पू बंसल के ख़िलाफ़ कोर्ट से ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी है, वो खुलेआम घूम रहा है और दफ़्तरों में जाकर बयान दे रहा है, लेकिन एजेंसियाँ उसे गिरफ़्तार नहीं कर रही हैं। इससे समझा जा सकता है कि ये एजेंसियाँ और सरकार अदालत का कितना सम्मान करती हैं।




