छत्तीसगढ़

31 जुलाई के बाद लगेगा मानसून पर ब्रेक, बारिश का ज़ोर पड़ेगा कमज़ोर

प्रदेश के कई ज़िलों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी

AINS NEWS… छत्तीसगढ़ में मानसून सीज़न इस वक़्त अपने पूरे ज़ोरों पर है। प्रदेश के ज़्यादातर इलाक़ों में पिछले कई दिनों से रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी है। चाहे बात राजधानी रायपुर की हो, या बस्तर, कांकेर, दंतेवाड़ा, मुंगेली, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा, बेमेतरा, और राजनांदगांव की… हर जगह आसमान में बादल डेरा डाले हुए हैं और हल्की से मध्यम बारिश हो रही है।

अगर हम पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर नज़र डालें, तो मुंगेली ज़िले में सबसे ज़्यादा 5 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई है। वहीं, दुर्गकोंदल में 4 सेंटीमीटर और प्रदेश के कई दूसरे हिस्सों में 1 से 3 सेंटीमीटर तक बारिश हुई है। रायपुर में भी दिनभर बादलों की आवाजाही बनी हुई है और यहां का अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आस-पास बना हुआ है, जिससे मौसम काफ़ी सुहावना हो गया है।

लेकिन इस सुहावने मौसम के साथ एक चेतावनी भी जुड़ी हुई है। मौसम विभाग ने 30 जुलाई तक प्रदेश के कई ज़िलों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। ख़ासतौर पर बस्तर संभाग के ज़िले जैसे सुकमा, बीजापुर, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कांकेर, और कोण्डागांव के साथ-साथ मुंगेली में भी गर्जन और वज्रपात के साथ तेज़ बारिश की संभावना जताई गई है।

दरअसल, इस वक़्त प्रदेश में मानसून की ज़बरदस्त सक्रियता का मुख्य कारण है एक निम्न दबाव का क्षेत्र, यह सिस्टम उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उसके आस-पास के इलाक़ों पर बना हुआ है और समुद्र तल से 5.8 किलोमीटर की ऊँचाई तक फैला हुआ है। जब भी ऐसा कोई मज़बूत सिस्टम बनता है, तो वह अपने आस-पास की सारी नमी को खींच लेता है, जिससे भारी बारिश होती है।

इसके अलावा, एक चक्रवातीय परिसंचरण पूर्वोत्तर अरब सागर से लेकर गुजरात, मध्य प्रदेश और झारखंड होते हुए दक्षिण बांग्लादेश तक फैला है। साथ ही, मानसून द्रोणिका, जिसे मॉनसून ट्रफ़ भी कहते हैं, श्रीगंगानगर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। ये सभी सिस्टम मिलकर छत्तीसगढ़ में मानसून को पूरी तरह से सक्रिय बनाए हुए हैं।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 31 जुलाई के बाद प्रदेश में मानसून की रफ़्तार धीमी पड़ सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि बारिश पूरी तरह से बंद हो जाएगी, लेकिन जो झमाझम बारिश का दौर चल रहा है, उसकी तीव्रता में धीरे-धीरे कमी आएगी। ज़्यादातर ज़िलों में भारी बारिश का सिलसिला थमेगा और हल्की से मध्यम बौछारों तक ही सीमित रह जाएगा। कुछ इलाक़ों में हल्की बारिश और मेघ गर्जना की गतिविधियां बनी रह सकती हैं, लेकिन कुल मिलाकर बारिश का ज़ोर कमज़ोर पड़ेगा।

अगले दो-तीन दिनों तक तो बारिश की तीव्रता लगभग ऐसी ही बनी रहेगी, लेकिन उसके बाद मानसून के कमज़ोर पड़ने के संकेत साफ़ हैं। अगस्त महीने की शुरुआत में मानसून में ये उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जो आने वाले दिनों में खेती-किसानी के लिए भी काफ़ी निर्णायक साबित होगा।

कुल मिलाकर निष्कर्ष यही है कि छत्तीसगढ़ में मानसून फिलहाल पूरी तरह मेहरबान है, लेकिन 31 जुलाई के बाद इसकी रफ़्तार पर ब्रेक लग सकता है और बारिश में कमी आ सकती है। यह बदलाव धीरे-धीरे होगा और अगस्त की शुरुआत तक इसका असर साफ़ दिखने लगेगा।

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