छत्तीसगढ़

कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सशर्त जमानत दे दी ननों को

नन प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस, पिछले 9 दिनों से दुर्ग जेल में बंद थीं

AINS NEWS… दुर्ग में गिरफ्तार की गई दोनों ननों को आखिरकार जमानत मिल गई है। ये दोनों नन प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस, पिछले 9 दिनों से दुर्ग जेल में बंद थीं। इन पर इंसान तस्करी और जबरन धर्मांतरण जैसे गंभीर आरोप लगे थे। मामला इतना संवेदनशील था कि संसद से लेकर सड़कों तक हंगामा मचा रहा। केरल के कई सांसद और नेता इनकी रिहाई के लिए लगातार केंद्र और राज्य सरकार पर दबाव बना रहे थे। लेकिन, आज बिलासपुर की NIA कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सशर्त जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा, जांच अभी जारी है और अंतिम फैसला आना बाकी है।सियासी दलों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा बताया, वहीं छत्तीसगढ़ सरकार ने कानून के मुताबिक जांच की बात कही। फिलहाल दोनों नन जेल से बाहर आ सकेंगी, लेकिन केस की अगली सुनवाई तक उनपर साझी निगरानी रहेगी।

भारत के आदिवासी राज्यों में धर्म परिवर्तन हमेशा से एक संवेदनशील और बड़ा मुद्दा रहा है। अक्सर पादरियों पर लालच देकर या ज़बरदस्ती कथित धर्म बदलवाने के आरोप लगते रहे हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ के इतिहास में ये पहली बार है जब दो ननों को ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य (संशोधन) अधिनियम’ और मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोपों में गिरफ़्तार किया गया है।

ये घटना है पिछले शुक्रवार की। जगह- दुर्ग रेलवे स्टेशन। केरल के सीरियाई-मालाबार चर्च से जुड़ी दो ननों, सिस्टर प्रीति मैरी और सिस्टर वंदना फ्रांसिस, को जीआरपी (गवर्नमेंट रेलवे पुलिस) गिरफ़्तार कर लेती है। उनके साथ सुकामन मंडावी नाम के एक और शख़्स को भी पकड़ा जाता है।

अब सवाल उठता है कि ये ननें हैं कौन? सिस्टर प्रीति मैरी केरल के एर्नाकुलम ज़िले की रहने वाली हैं और पेशे से एक फार्मासिस्ट हैं। वहीं, सिस्टर वंदना फ्रांसिस कन्नूर की हैं और एक नर्स हैं। दोनों ही ‘असीसी सिस्टर्स ऑफ़ मैरी इमैक्युलेट’ संस्था से जुड़ी हैं और सालों से नॉर्थ इंडिया में सेवा दे रही हैं। दिलचस्प बात ये है कि इनके परिवार के अन्य सदस्य भी चर्च की सेवा से जुड़े हुए हैं।

पुलिस में दर्ज एफ़आईआर के मुताबिक़, इन दोनों ननों पर नारायणपुर की तीन आदिवासी महिलाओं को ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन कराने और उन्हें मानव तस्करी के ज़रिए कहीं ले जाने का गंभीर आरोप है। पुलिस का कहना है कि उन्हें इसकी सूचना मिली थी, जिसके आधार पर ये कार्रवाई की गई। फ़िलहाल, दोनों ननों को रायपुर के महिला आश्रय गृह में रखा गया है और मामला अदालत में है।

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