IAS अफसरों ने कांग्रेस शासन में फर्जी NGO बनाया था, जिसकी आड़ में एक हजार करोड़ का घोटाला, फर्जी NGO की जांच सीबीआई करेगी
फर्जी NGO बनाकर CSR फंड से करोड़ों का ठेका दिलाने के नाम पर 15 राज्यों में 150 करोड़ की ठगी

AINS NEWS… बिलासपुर हाईकोर्ट ने फर्जी NGO मामले में कार्रवाई करने के निर्देश सीबीआई को दिए है, यानि अब फर्जी NGO की जांच सीबीआई करेगी, बताया जा रहा है कि IAS अफसरों ने कांग्रेस शासन में फर्जी NGO बनाया था, जिसकी आड़ में एक हजार करोड़ का घोटाला किया है। फर्जी NGO मामले में रिटायर्ड आईएएस विवेक ढांढ और एमके राउत का नाम आया है। एमके राउत छत्तीसगढ़ के तेजतर्रार आईएएस रहे हैं। वे रायपुर व बिलासपुर के कलेक्टर के अलावा कई महत्वपूर्ण विभागों के सचिव रह चुके हैं। वे अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद से रिटायर हुए थे। मूलत: ओडिशा के राउत 1984 बैच के आईएएस थे।

विवेक ढांड 1981 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह छत्तीसगढ़ के मूल निवासी हैं। ढांड 1 मार्च 2014 को राज्य के मुख्य सचिव बने थे। उनके नाम सबसे लंबे समय तक मुख्य सचिव बने रहने का रेकॉर्ड है। वह 3 साल 7 महीने से ज्यादा समय तक राज्य के मुख्य सचिव रहे। विवेक ढांड भूपेश बघेल की सरकार में नवाचार आयोग के अध्यक्ष पद पर काम कर चुके हैं। वे रेरा के भी अध्यक्ष रहे और उनका नाम छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले और जमीन घोटाले में भी सामने आया था। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार जाने के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
मामले में इनके भी नाम हैं..

बता दें कि बीते 4 महीने पहले फर्जी NGO बनाकर CSR फंड से करोड़ों का ठेका दिलाने के नाम पर 15 राज्यों में 150 करोड़ की ठगी करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड रत्नाकर उपाध्याय और संस्था की डायरेक्टर अनिता उपाध्याय को जशपुर पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था। आरोपियों ने दिल्ली में ‘राष्ट्रीय ग्रामीण साक्षरता मिशन’ नाम से एक फर्जी एनजीओ रजिस्टर कराया था। इसके जरिए वे कई राज्यों में कारोबारियों और सप्लायर्स को झांसा देते थे कि उनकी संस्था को सरकार से CSR फंड मिल रहा है, जिससे गरीब बच्चों के लिए किताबें, ड्रेस, स्वेटर, बैग और जूते की सप्लाई के लिए ठेका दिया जाएगा। झांसे में आकर कारोबारी आरोपियों को सुरक्षा राशि के तौर पर 25 लाख, प्रोसेसिंग फीस और कमीशन के नाम पर 10 लाख रुपए तक की रकम दे देते थे







































