नन अरेस्ट और दुर्ग रेलवे स्टेशन घटना पर राज्य महिला आयोग ने अपनाया कड़ा रुख, 15 दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश
दुर्ग का यह नन अरेस्ट मामला पहले भी देशभर में सुर्खियों में रहा

AINS NEWS… छत्तीसगढ़ बहुचर्चित केस नन अरेस्ट और दुर्ग रेलवे स्टेशन घटना पर राज्य महिला आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है. नन अरेस्ट मामले में जहां आयोग ने तीसरी पेशी में भी अनुपस्थित आरोपी पक्ष और संदिग्ध सीसीटीवी फुटेज पर सवाल उठाए हैं, वहीं दुर्ग स्टेशन प्रकरण में डीजीपी को 15 दिनों के भीतर सभी पीड़िताओं की अलग-अलग एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं. आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय में कार्रवाई नहीं हुई तो मामला राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग तक ले जाया जाएगा.

राज्य महिला आयोग में नन अरेस्ट मामले की तीसरी सुनवाई रखी गई थी. नारायणपुर की तीनों आदिवासी पीड़िताएं इस बार भी व्यक्तिगत रूप से आयोग के सामने पेश हुईं, लेकिन आरोपी पक्ष यानी अनावेदक लगातार तीसरी बार नदारद रहा. आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि बार-बार पेशी से बचना न्यायिक प्रक्रिया की अवमानना है.
महिला आयोग को डीआरएम कार्यालय से एक पेनड्राइव प्राप्त हुई, जिसमें केवल दुर्ग रेलवे स्टेशन के एक गेट की सीसीटीवी फुटेज दी गई थी. डॉ. किरणमयी नायक ने सवाल उठाया कि क्या पूरे स्टेशन में केवल एक ही कैमरा लगा है? उन्होंने इसे साक्ष्य छिपाने की साजिश करार दिया. आयोग ने चेतावनी दी कि यदि पूरी फुटेज उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो आयोग स्वयं कार्रवाई तय करेगा.
डॉ. किरणमयी नायक ने कहा कि यदि रेलवे या जीआरपी पूरी सीसीटीवी फुटेज नहीं देते, तो आयोग सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को साक्ष्य मानकर कार्रवाई करेगा. उन्होंने कहा, रेलवे के अधिकारी या तो गुमराह कर रहे हैं या फिर कुछ छुपा रहे हैं, लेकिन अब कार्रवाई तय है.
जीआरपी और डीआरएम दोनों एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोप रहे हैं. डीआरएम का कहना है कि यह मामला जीआरपी के तहत आता है, जबकि जीआरपी का कहना है कि यह रेलवे प्रशासन के अधीन है. यह केवल जिम्मेदारी से बचने का प्रयास है, लेकिन आयोग अब सख्ती से काम करेगा
आयोग में पेश हुई पीड़ित युवतियों ने बताया कि उनके साथ छेड़छाड़, गाली-गलौज और गैंगरेप तक की धमकी तक दी गई. हैरानी की बात यह है कि यह सब पुलिस की मौजूदगी में हुआ. आरोप है कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उन्हें धमकाया और एक महिला ने उनके साथ मारपीट भी की.
पीडित युवतियो के साथ पहुंचे नारायणपुर कम्युनिस्ट पार्टी के असिस्टेंट सेक्रेटरी फूल सिंह कचलाम ने बताया कि वे लोग तीसरी बार महिला आयोग पहुंचे हैं. लेकिन दूसरा पक्ष जो अनावेदक हैं, वह एक बार भी नहीं आए, फूल सिंह कचलाम ने बताया कि पीडिता ने राज्यपाल को पत्र लिखकर महिला आयोग की तीन सदस्याओं को हटाने की मांग की है, यह आरोप लगाते हुए कि वे अनावेदक पक्ष का बचाव कर रही हैं.
दुर्ग का यह नन अरेस्ट मामला पहले भी देशभर में सुर्खियों में रहा है. मानव तस्करी, धर्मांतरण और पुलिस की भूमिका को लेकर राजनीतिक माहौल गर्मा गया था. अब महिला आयोग की कार्यवाही से यह प्रकरण एक बार फिर राज्य से लेकर दिल्ली तक तूल पकड़ सकता है.




