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पुलिस की वर्दी का इतिहास, भारत में पुलिस वर्दी का इतिहास उतना ही दिलचस्प है जितनी उसकी पहचान

केंद्र सरकार अब पूरे देश में ‘वन नेशन, वन पुलिस यूनिफॉर्म’ योजना को लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है

AINS NEWS… केंद्र सरकार अब पूरे देश में ‘वन नेशन, वन पुलिस यूनिफॉर्म’ योजना को लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इस योजना के तहत देशभर में पुलिस की वर्दी को एक समान बनाने की तैयारी चल रही है। गृह मंत्रालय (MHA) ने इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए 16 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से उनकी पुलिस वर्दी से जुड़ी जानकारी माँगी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गृह मंत्रालय ने राज्यों को 4 नवंबर 2025 तक वर्दी की डिजाइन, गुणवत्ता और लागत से संबंधित सभी विवरण भेजने के निर्देश दिए हैं। जिन राज्यों से जानकारी माँगी गई है, उनमें आंध्र प्रदेश, केरल, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य शामिल हैं।

गृह मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह जानकारी सिपाही से लेकर डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) तक के सभी रैंकों की वर्दी से जुड़ी होनी चाहिए। साथ ही हर रैंक के लिए तय वार्षिक वर्दी भत्ता और पूरी वर्दी की औसत लागत का ब्योरा भी देने को कहा गया है। सरकार का उद्देश्य है कि देशभर में पुलिस की वर्दी एक जैसी हो, जिससे एक समानता और एकता की भावना मजबूत हो।

पुलिस की वर्दी का इतिहास

भारत में पुलिस वर्दी का इतिहास उतना ही दिलचस्प है जितनी उसकी पहचान। अंग्रेजी राज के दौर में जब पुलिस बल की स्थापना हुई, तब उसकी वर्दी सफेद रंग की थी, जो शाही और सभ्य मानी जाती थी। लेकिन जल्द ही अंग्रेज अधिकारियों को अहसास हुआ कि सफेद कपड़े पर जरा सी गंदगी भी साफ दिखती थी, जिससे वर्दी की चमक बनाए रखना मुश्किल हो गया।

इस चुनौती ने एक नए विचार को जन्म दिया। 19वीं सदी के मध्य में ब्रिटिश सैनिकों ने अपनी वर्दी को धूल जैसे रंगों में रंगना शुरू किया, ताकि यह वातावरण से मेल खा सके और गंदगी छिपी रहे। उन्होंने चाय की पत्तियों, गंदे पानी और कत्थे जैसे प्राकृतिक पदार्थों से प्रयोग किए। इन रंगों के मेल से बना ‘खाकी’ जिसका मतलब ही है धूल या मिट्टी जैसा।

सर हैरी बर्नेट लम्सडेन ने 1847 में इसे पहली बार औपचारिक रूप से वर्दी के रूप में अपनाया। वहीं, सर हेनरी लॉरेंस, जो उस समय लाहौर में ‘कोर ऑफ गाइड फोर्स’ के प्रमुख थे, उन्होंने इस व्यावहारिक रंग की उपयोगिता को देखते हुए इसे पुलिस की आधिकारिक वर्दी घोषित कर दिया।

इस तरह, भारत में खाकी का जन्म हुआ। एक ऐसा रंग जो न सिर्फ उपयोगी था बल्कि सादगी और दृढ़ता का प्रतीक भी बन गया। समय के साथ चाय और कत्थे से बना प्राकृतिक खाकी अब सिंथेटिक रंगों से तैयार किया जाने लगा। यह हल्के भूरे और पीले रंग का मिश्रण होता है, ऐसा रंग जो न ज्यादा चमकीला है, न ज्यादा फीका, पर बिल्कुल भरोसेमंद।

 

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