RAIPUR

12 राज्यों की पुलिस और कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं अमित बघेल को

आप अपनी जुबान संभालकर रखें... राज्य पुलिस आएगी और आपको अपने-अपने राज्यों में ले जाएगी - सुप्रीम कोर्ट

AINS NEWS… सुप्रीम कोर्ट ने 24 नवंबर को सुनवाई करते हुए अमित बघेल की अग्रिम जमानत और सभी एफआईआर को एक साथ जोड़ने की याचिका पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा, आप अपनी जुबान संभालकर रखें… राज्य पुलिस आएगी और आपको अपने-अपने राज्यों में ले जाएगी। अब आप पूरे देश की सैर का आनंद लीजिए।

यह पूरा विवाद शुरू हुआ 26 अक्टूबर 2025 को। रायपुर के वीआईपी चौक पर स्थित छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति के साथ कुछ असामाजिक तत्वों ने तोड़फोड़ की। यह एक बेहद संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दा था। पुलिस जांच में पता चला कि मूर्ति तोड़ने वाला आरोपी मानसिक रूप से बीमार था और उसने नशे की हालत में यह कृत्य किया था। प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए मूर्ति को दोबारा सम्मानपूर्वक स्थापित भी कर दिया।

लेकिन, इसके अगले ही दिन यानी 27 अक्टूबर को, इस मुद्दे ने एक अलग ही रंग ले लिया। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के अध्यक्ष अमित बघेल ने इस घटना को लेकर एक सार्वजनिक बयान दिया। आरोप है कि अपने बयान में उन्होंने सिंधी और अग्रवाल समाज के आराध्य देवताओं और महापुरुषों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।

एक तरफ छत्तीसगढ़ महतारी के अपमान से लोग आहत थे, वहीं दूसरी तरफ अमित बघेल के इस बयान ने सिंधी और अग्रवाल समाज की भावनाओं को गहरा आघात पहुंचाया। उन्होंने भगवान झूलेलाल और महाराजा अग्रसेन पर टिप्पणी की थी। इसके बाद तो जैसे विरोध की लहर दौड़ पड़ी। न केवल छत्तीसगढ़ में, बल्कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु समेत देश के कई राज्यों में सिंधी और अग्रवाल समाज सड़कों पर उतर आया। उनका कहना था कि उन्हें ‘पाकिस्तानी’ कहकर अपमानित किया गया है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को ज्ञापन सौंपे गए और अमित बघेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई।

देश के अलग-अलग कोनों में अमित बघेल के खिलाफ दर्जनभर से ज्यादा एफआईआर दर्ज हो गईं। गिरफ्तारी के डर से बघेल फरार हो गए। पुलिस ने रायपुर के मोवा स्थित उनके परिचितों के घर भी छापेमारी की, लेकिन वे हाथ नहीं आए।

इसी बीच, राहत पाने के लिए अमित बघेल के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट में उनके वकील ने दलील दी कि “बयान गुस्से में दिया गया था, किसी की भावनाएं आहत करने का इरादा नहीं था।” उन्होंने यह भी मांग की कि चूंकि छत्तीसगढ़ में पहले से 5 एफआईआर दर्ज हैं, इसलिए बाकी राज्यों के मामले भी यहीं ट्रांसफर कर दिए जाएं।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी को हर उस राज्य की कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा जहां एफआईआर दर्ज है। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि वे इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। यानी अब अमित बघेल को उन सभी 12 राज्यों की पुलिस और कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं जहां उनके खिलाफ मामले दर्ज हैं।

 

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