मनखे मनखे एक समान” की राह पर चलता बस्तर, गुरु घासीदास जयंती पर मां दंतेश्वरी हर्बल समूह का राष्ट्रीय संदेश
धरती को विषमुक्त बनाने और आदिवासी समाज को स्वावलंबी बनाने में अग्रणी, मां दंतेश्वरी हर्बल समूह ने गुरु घासीदास जी को दी श्रद्धांजलि

AINS NEWS… छत्तीसगढ़ के महान समाज सुधारक परमपूज्य संत गुरु घासीदास जी की जयंती पर सोमवार को ‘मां दंतेश्वरी हर्बल समूह’ द्वारा गरिमामय समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में परमपूज्य गुरु घासीदास जी द्वारा दिए गए अमर संदेश “मनखे मनखे एक समान” को वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में एकमात्र समाधान बताते हुए सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी सशक्तीकरण की दिशा में समूह के योगदान की सराहना की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मां दंतेश्वरी हर्बल समूह के संस्थापक और राष्ट्रीय किसान नेता डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने कहा कि ,
“परमपूज्य गुरु घासीदास जी ने जिस समता, सत्य और अहिंसा की विचारधारा का प्रसार किया, हमारी संस्था उसी भावना के साथ समाज के हर वर्ग को जोड़ने, धरती को विषमुक्त बनाने और आदिवासी समाज को स्वावलंबी बनाने का कार्य कर रही है।”
पिछले कई वर्षों से समूह द्वारा छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदायों के साथ मिलकर जैविक और आयुर्वेदिक खेती, वनउत्पाद प्रसंस्करण, प्राकृतिक औषधीय कृषि, तथा हरित रोजगार आधारित आजीविका कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों ने सैकड़ों आदिवासी परिवारों को आर्थिक स्वतंत्रता, सामाजिक सम्मान और सांस्कृतिक गौरव प्रदान किया है।
डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि जब परमपूज्य गुरु घासीदास जी ने कहा था कि
“काबा और काशी में कोई अंतर नहीं,”
तब उन्होंने समानता और मानवता का जो मार्ग दिखाया था, वही आज के सामाजिक तनावों और धार्मिक विभाजन के दौर में भारत की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि देश भर में समाज को जाति, धर्म और समुदाय के नाम पर बांटने की कोशिशें लगातार बढ़ रही हैं। कहीं धार्मिक प्रतीकों पर विवाद, कहीं सामाजिक वैमनस्यता और कहीं नफरत का प्रचार, भारतीय समाज को चोट पहुंचा रहा है। ऐसे संवेदनशील समय में परमपूज्य गुरु घासीदास जी का “मनखे मनखे एक समान” का दर्शन ही भारत को जोड़ने वाली शक्ति के रूप में उभर सकता है।
इस अवसर पर एमडी बोटैनिकल्स की सीईओ सुश्री अपूर्वा त्रिपाठी तथा विपणन विशेषज्ञ केविन विशेष रूप से उपस्थित रहे। समारोह की शुरुआत संपदा समाज सेवी संस्थान की प्रमुख जसमती नेताम और शिप्रा जी द्वारा परमपूज्य गुरु घासीदास जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। संपूर्ण परिसर “मनखे मनखे एक समान” के नारे से गूंज उठा।
समूह के प्रतिनिधियों ने बताया कि जैविक खेती करके उगाई गई प्राकृतिक वनौषधियों से आयुर्वेद तथा नवीन रिसर्च पर आधारित “एमडी बोटैनिकल्स ” के अंतरराष्ट्रीय स्तर के गुणवत्ता वाले प्रमाणित रूप से असरकारी उत्पादों के माध्यम से संपूर्ण मानवता को रोग व्याधि से मुक्ति प्रदान करने तथा धरती को रसायन मुक्त बनाने का हमारा अभियान परमपूज्य गुरु घासीदास जी की सत्य और पवित्रता की परंपरा को आगे बढ़ाता है। यह न केवल स्वास्थ्य की सुरक्षा का मार्ग है बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक क्रांतिकारी कदम है।
मां दंतेश्वरी हर्बल समूह तथा ‘एमडी बोटैनिकल्स’ ने मिलकर भारतीय पारंपरिक ज्ञान को नवीनतम वैज्ञानिक शोधों से जोड़कर तैयार किए गए अनूठे असरदार उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाज़ारों तक पहुंचाया है। इससे बस्तर की पहचान नई ऊंचाई पर पहुंची है और मुख्य रूप से हमारी आदिवासी महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित मां दंतेश्वरी हर्बल समूह के प्रतिनिधियों ने संकल्प लिया कि,
सत्य, समानता और मानवता पर आधारित परम पूज्य गुरु घासीदास जी की शिक्षाओं को न केवल याद रखा जाएगा, बल्कि धरातल पर लागू कर भारत के सामाजिक ताने-बाने को और मजबूत किया जाएगा।
परमपूज्य गुरु घासीदास जी को शत् शत् नमन।




