RAIPUR

प्रकृति और विकास को आमने-सामने नहीं, बल्कि समानांतर चलाना होगा – डॉ. मोहन भागवत

युवा संवाद कार्यक्रम में अरावली पर्वतमाला का उदाहरण देते हुए अंधाधुंध विकास पर चिंता जताई

AINS NEWS… राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रायपुर एम्स में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में अरावली पर्वतमाला का उदाहरण देते हुए अंधाधुंध विकास पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि अब तक दुनिया ऐसा विकास मॉडल नहीं बना पाई है, जिसमें पर्यावरण और इन्फ्रास्ट्रक्चर बिना नुकसान के साथ-साथ आगे बढ़ सकें. इसलिए आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए विकास और प्रकृति के बीच संतुलन तलाशना आज सबसे बड़ी जरूरत बन गई है.

अरावली पर्वतमाला का उदाहरण देकर चेतावनी

मोहन भागवत ने अरावली पर्वत श्रृंखला का उल्लेख करते हुए कहा कि अंधाधुंध विकास अगर इसी तरह जारी रहा, तो आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरणीय असंतुलन की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रकृति और विकास को आमने-सामने नहीं, बल्कि समानांतर चलाना होगा.

नीतियों और जीवनशैली में बदलाव की जरूरत

सरसंघचालक ने कहा कि सिर्फ सरकारी नीतियों से ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों की जीवनशैली में बदलाव से भी पर्यावरण की रक्षा संभव है. इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण को प्राथमिकता देना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है.

 

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