छत्तीसगढ़

बडेडोंगर का वार्षिक मेला होने के बाद 5अप्रेल को लगेगा रनवीर मेला, महिलाऐं दूर से दर्शन पूजन कर लेती हैं पर प्रसाद ग्रहण नहीं करती

पहाड पर हुए भयंकर युद्ध में मां के तलवार के तेज से रनवीर का जन्म हुआ था तो कोई कोई कहते हैं की रनवीर नागवंशी राजा का महाप्रतापी पुत्र थे जो देव हुऐ |

के.शशिधरण व कृष्णदत्त उपाध्याय की रिपोर्ट
AINS KONDAGAON…केशकाल….कोंडागांव जिले की अतिप्राचिन प्रसिद्ध धार्मिक स्थली बडेडोंगर का वार्षिक मेला 31 मार्च शुक्रवार को बडे हर्षोल्लास के सांथ हुआ | वार्षिक मेले के पांच दिन बाद 5 अप्रेल बुधवार को फिर से बडेडोंगर मेला होगा जिस मेला को कहते हैं रनवीर मेला,
रनवीर देव की वीरगाथा को लेकर यंहा पर लोग अपनी अपनी जुबान से अनेक कहानी और किवदंती बताते हैं। कोई कहता है की महिषाषुर मर्दिनी मां दुर्गा और महिषाषुर के बीच बडडोंगर स्थित पहाड पर हुए भयंकर युद्ध में मां के तलवार के तेज से रनवीर का जन्म हुआ था तो कोई कोई कहते हैं की रनवीर नागवंशी राजा का महाप्रतापी पुत्र थे जो देव हुऐ | रनवीर देव के बारे मे कथा कहानी किवदंती भले भिन्न भिन्न हो पर सभी कथा कहानी किवदंती में यह एक रूपता जरूर है रनवीर देव बहुत वीर योद्धा थे और सभी पूरे अगाध आस्था से यह बताते है की रनवीर देव के पास अपनी दुख तकलीफ फरियाद लेकर आने वालों का दुख तकलीफ जरूर दूर होता है और मनोकामना पूरी होती है । रनवीर देव का वार शनिवार तथा मंगलवार है पर केवल गुरूवार को छोडकर शेष दिन भी रनवीर देव का दर खुलता है और आने वाले दर्शन कर अपनी तकलीफ समस्या रखते है । रनवीर देव अपने सिरहा के सिर पर आते हैं और आगंतुक जिज्ञासा का शांत करते उसके कष्ट निदान के बारे मे बताते हैं |

जिस तरह से बडेडोंगर वाली मां दंतेश्वरी के दर पर लोग बहुत दूर दूर से दर्शन पूजन करने लोग आते हैं उसी तरह से रनवीर देव के प्रति अटूट आस्था लिए बहुत दूर दूर से लोग अपनी दुख तकलीफ समस्या लेकर आते हैं ।
5 अप्रेल बुधवार को बडेडोंगर में होने वाले रनवीर मेला में बस्तर संभाग के बाहर से तथा छत्तीसगढ से बाहर मध्यप्रदेश तथा महाराष्ट्र से भी रनवीर देव के प्रति श्रद्धालु अगाध आस्था लिए आते हैं ।

महिलाओं का मंदिर प्रवेश तथा प्रसाद ग्रहंण करना है निषेध—
रनवीर देव के मंदिर के गर्भ गृह से लेकर मंदिर के प्रागंण में भी महिलाओं का प्रवेश प्रतिबंधित है और प्रसाद ग्रहण करना वर्जित है । इसलिए महिलाऐं रनवीर देव के मेला मे आते जरूर है पर दूर से दर्शन पूजन कर लेती हैं पर प्रसाद ग्रहण नहीं करती ।

 

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