छत्तीसगढ़

नक्सलियों ने एक प्रेस नोट जारी किया, हथियार छोड़ने और शांतिवार्ता के लिए तैयार लेकिन नक्सल ऑपरेशन बंद करना होगा

सरकार नक्सल समस्या का हल निकालने के लिए गंभीर है और सार्थक वार्ता के लिए तैयार है

AINS NEWS… हाल ही में नक्सलियों ने एक प्रेस नोट जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि वे हथियार छोड़ने और शांतिवार्ता के लिए तैयार हैं। लेकिन इसके लिए उनकी एक शर्त है – केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार को नक्सल ऑपरेशन बंद करना होगा। नक्सलियों का कहना है कि सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई की वजह से उनके पास यह कदम उठाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा।

यह प्रेस नोट कई सवाल खड़े करता है। पहला, क्या नक्सली वाकई शांति चाहते हैं, या यह सिर्फ समय हासिल करने की एक चाल है? दूसरा, क्या उनकी शर्त जायज है? नक्सलियों का इतिहास देखें, तो उन्होंने कई बार वार्ता की बात कही, लेकिन बाद में हिंसा का रास्ता अपनाया। 2010 में भी एक ऐसी ही कोशिश हुई थी, जब नक्सलियों ने शांति की बात की, लेकिन कुछ ही महीनों बाद उन्होंने सुरक्षाबलों पर हमला कर दिया।

पिछले डेढ़ साल में छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ अभियान तेज हुआ है। कई बड़े नक्सली कमांडर या तो मारे गए हैं या उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया है। ऐसे में यह प्रेस नोट उनकी कमजोरी का संकेत हो सकता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सरकार उनकी शर्त मानेगी?

नक्सलियों के प्रेस नोट के बाद छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा का बयान सामने आया है। उन्होंने साफ कहा कि सरकार नक्सल समस्या का हल निकालने के लिए गंभीर है और सार्थक वार्ता के लिए तैयार है। लेकिन उनकी एक शर्त है – नक्सलियों को भारतीय संविधान को मानना होगा।

विजय शर्मा ने कहा कि अगर नक्सली वाकई मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, तो उन्हें अपने प्रतिनिधि और वार्ता की शर्तों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वार्ता किसी कट्टरपंथी विचारधारा के आधार पर नहीं हो सकती। अगर नक्सली संविधान को नकारते हैं और अपनी समानांतर व्यवस्था थोपने की कोशिश करते हैं, तो वार्ता का कोई मतलब नहीं है।
साथ ही, सरकार ने अपनी पुनर्वास नीति को भी दोहराया। विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने अब तक की सबसे बेहतर पुनर्वास नीति लागू की है। जो भी नक्सली आत्मसमर्पण करेगा, उसे सुरक्षा, रोजगार, और एक नया जीवन शुरू करने का मौका दिया जाएगा। सरकार का मकसद है कि भटके हुए लोग समाज में वापस आएं और एक सामान्य जिंदगी जी सकें।

लेकिन सरकार का रुख सख्त भी है। विजय शर्मा ने साफ कहा कि हिंसा और खूनखराबे पर कोई समझौता नहीं होगा। नक्सलियों को हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करना होगा, तभी कोई सार्थक समाधान निकल सकता है।

विजय शर्मा ने एक और महत्वपूर्ण बात कही – पिछले डेढ़ साल में छत्तीसगढ़ के 40 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया है। ये वो गांव हैं, जहां पहले नक्सलियों का कब्जा था। नक्सली इन गांवों में अपनी समानांतर सरकार चलाते थे, लेकिन अब वहां भारतीय संविधान लागू हो रहा है।
यह एक बड़ा बदलाव है। छत्तीसगढ़ के इन दुर्गम इलाकों में पहले स्कूल, अस्पताल, और बुनियादी सुविधाएं तक नहीं थीं। नक्सलियों ने इन गांवों को विकास से दूर रखा। लेकिन अब सरकार इन इलाकों में सड़कें, बिजली, और शिक्षा लाने की कोशिश कर रही है।

 

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