छत्तीसगढ़

सड़कों पर मवेशी, बर्थडे और डीजे के लिए बने एसओपी नियमों का नहीं हो रहा पालन, दीर्घकालिक उपाय की है जरूरत – मुख्य सचिव

नियमों का पालन नहीं होने पर राज्य के मुख्य सचिव ने इसे गंभीरता से लिया

AINS NEWS… राज्य शासन द्वारा सड़कों पर आवारा मवेशियों के कारण होने वाले दुर्घटनाओं, सड़कों पर केक काटकर जन्मदिन मनाने और डीजे की आवाज के कारण होने वाली परेशानियों से बचने के लिए एसओपी बनाए गए हैं लेकिन इनका कड़ाई से पालन नहीं होता यही वजह है कि हाईकोर्ट ने 25 याचिकाओं और 20 से ज्यादा मामलों में संज्ञान लेने और फटकार लगाने के बाद भी इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं हो पा रही है।

नियमों का पालन नहीं होने पर राज्य के मुख्य सचिव ने इसे गंभीरता से लिया। यही वजह है कि कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों के कॉन्फ्रेंस में इन महत्वपूर्ण घटनाओं को एजेंडे में शामिल किया गया। साथ ही स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निज सचिव द्वारा अपनी पत्नी का जन्मदिन सड़क पर मनाए जाने और सड़क पर घूम रहे आवारा मवेशियों के नियंत्रण जैसे विषयों को प्रमुखता से इस चर्चा में शामिल किया गया।
सभी कलेक्टर और एसपी ने राज्य शासन द्वारा जारी एसओपी का पालन करने के लिए मुख्यमंत्री को आश्वस्त भी किया।

मुख्य सचिव ने कहा कि सभी जिम्मेदार अफसर इस बात का ध्यान रखें की जनता के हितों की रक्षा के लिए और सभी प्रकार की परेशानियों को दूर करने के लिए दीर्घकालिक उपाय किए जाने चाहिए।
हाई कोर्ट की सख्ती के बाद राज्य शासन ने भी सख्ती बरती है और इस तरह के मामलों में पीड़ित को क्षतिपूर्ति देने उपभोक्ता फोरम में मामला दर्ज करने की छूट भी दी गई है, साथ ही राज्य और केंद्र सरकार के साथ टोल टैक्स वसूलने वालों को भी पक्षकार बना बनाया जा सकता है।

सरकार ने सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों को पकड़ने की जिम्मेदारी संबंधित निकायों को दी है इसके लिए पशु मालिकों से जुर्माना भी वसूला जा सकता है, बकायदा सरकार ने इसके लिए निकायों को फंड भी देने की व्यवस्था की है। इसके अलावा सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए गोधाम योजना की भी शुरुआत की है जिसमें मवेशियों को एक जगह इकट्ठा रखने के लिए एनजीओ के अलावा कोई भी व्यक्ति या संस्था इसका संचालन कर सकती है, इस प्रावधान के मुताबिक इच्छुक संस्था या व्यक्ति को सरकार से अनुदान भी दिया जाएगा।
बहरहाल हाईकोर्ट की शक्ति राज्य शासन द्वारा एसओपी नियम और गोधाम जैसी योजनाओं के होने के बावजूद सड़कों पर आवारा मवेशियों की संख्या में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं देखी जा रही है, इसका कारण क्या है इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव के निर्देश और हाईकोर्ट की सख्ती के बाद राज्य शासन ने इन सब से निपटने के लिए संबंधित निकायों को खुली छूट भी दी है। लेकिन परेशानियां जस की तस हैं। कलेक्टर और एसपी के आश्वासन के बाद उम्मीद की जा सकती है कि सड़कों से आवारा मवेशी गोधाम में भेजे जाएंगे और तेज आवाज वाले डीजे रात 10:00 बजे के बाद नहीं बजाए जाएंगे साथ ही फैशन बना सड़कों पर केक काटना भी बंद होगा।

 

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