‘मीडिया परफॉर्मेंस पॉलिसी’, 47 विभागों की लिस्ट जारी की गई है और टारगेट सेट
सरकार ने काम के अनुसार कुल 100 नंबर का एक मूल्यांकन सिस्टम तैयार किया

AINS NEWS… छत्तीसगढ़ सरकार ने एक नई ‘मीडिया परफॉर्मेंस पॉलिसी’ लागू की है। जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी इस आदेश के मुताबिक, अब राज्य के सचिवों और जिला कलेक्टरों की परफॉर्मेंस का आकलन इस बात से होगा कि उनकी मीडिया में कितनी कवरेज है। सरकार ने साफ कर दिया है कि जो दिखता है, वही बिकता है। अफसरों को अब केवल जमीनी काम नहीं करना है, बल्कि उस काम को मीडिया के माध्यम से जनता के सामने लाना है। इसके लिए बाकायदा 47 विभागों की लिस्ट जारी की गई है और टारगेट सेट कर दिए गए हैं।

सरकार ने काम के अनुसार कुल 100 नंबर का एक मूल्यांकन सिस्टम तैयार किया है। अगर कोई अफसर एक प्रेस रिलीज़ जारी करता है और वह छपती है, तो उसके लिए 15 मार्क्स तय किए गए हैं। विभाग की सक्सेस स्टोरी पब्लिश कराने पर भी 15 मार्क्स मिलेंगे। अगर अफसर फेसबुक पर पोस्ट करता है, तो 15 मार्क्स, और X पर पोस्ट करने के लिए भी 15 मार्क्स रखे गए हैं।
अगर किसी विभाग की खबर राष्ट्रीय मीडिया में आती है, तो 10 मार्क्स मिलेंगे। राज्य स्तर के अखबारों में फ्रंट पेज पर खबर आने के 10 मार्क्स हैं। और सबसे महत्वपूर्ण, अगर मीडिया में कोई भ्रामक खबर चलती है और अफसर उसका तुरंत खंडन करते हैं, तो इसके लिए सबसे ज्यादा 20 मार्क्स रखे गए हैं। यानी, सरकार चाहती है कि अफसर न केवल अपनी उपलब्धियां गिनाएं, बल्कि नेगेटिव खबरों को भी काउंटर करें।
ट्राइबल विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणी बोरा का नाम टारगेट लिस्ट में सबसे ऊपर है। उन्हें हर हफ्ते 3 प्रेस रिलीज, 2 सक्सेस स्टोरी, 7 फेसबुक पोस्ट और 7 एक्स पोस्ट करने का लक्ष्य दिया गया है। यह पहली बार है जब किसी राज्य में ब्यूरोक्रेसी के लिए डिजिटल एक्टिविटी को इतना अनिवार्य और नपा-तुला बना दिया गया है।
रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे बड़े जिलों के कलेक्टरों के लिए तो टारगेट का पहाड़ खड़ा कर दिया गया है। इन कलेक्टरों को एक महीने में 150 प्रेस रिलीज जारी करनी होंगी।
इसके अलावा, उन्हें हर महीने 15 सक्सेस स्टोरीज, 4 नेशनल लेवल की खबरें, 4 स्टेट लेवल की फ्रंट पेज खबरें, 30 फेसबुक पोस्ट, 15 एक्स पोस्ट, और कम से कम 1 प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी होगी।
इस आदेश के बाद प्रशासनिक खेमे में चर्चाओं का बाजार गर्म है। अधिकारियों को डर है कि अगर टारगेट पूरा नहीं हुआ तो उनकी ‘परफॉर्मेंस रिपोर्ट’ खराब हो सकती है। वहीं, सरकार का तर्क है कि इससे Transparency आएगी। सरकार का मानना है कि विभाग जो अच्छा काम कर रहे हैं, वो जनता तक पहुँचना चाहिए और सोशल मीडिया आज के दौर में इसका सबसे बड़ा माध्यम है।




