छत्तीसगढ़

रायपुर में 5 लाख वोटर्स के नाम कटे, SIR अभियान का पहला चरण पूरा

कुल 22 लाख मतदाताओं में से लगभग 23% यानी करीब 5 लाख 11 हजार 136 नामों पर कैंची चली

AINS NEWS… छत्तीसगढ़ में चुनाव आयोग ने ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ यानी SIR अभियान का पहला चरण पूरा कर लिया है। लेकिन इसके नतीजे बेहद चौंकाने वाले हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो रायपुर की 7 विधानसभाओं और बलौदाबाजार विधानसभा को मिलाकर 5 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम लिस्ट से उड़ा दिए गए हैं। जी हाँ, 5 लाख! यह कोई छोटी संख्या नहीं है।

चुनाव आयोग का कहना है कि ये वो नाम थे जो या तो फर्जी थे, डुप्लिकेट थे, या फिर ऐसे लोग जो वहां रहते ही नहीं थे। इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा असर रायपुर जिले पर पड़ा है। यहाँ के कुल 22 लाख मतदाताओं में से लगभग 23% यानी करीब 5 लाख 11 हजार 136 नामों पर कैंची चली है।

जो नाम काटे गए हैं, उनमें से 3 लाख 87 हजार 330 लोग ‘शिफ्टेड’ कैटेगरी में हैं, यानी जिनका पता बदल चुका है। करीब 23 हजार 180 लोग ‘अनट्रेसेबल’ या अनुपस्थित पाए गए। वहीं, 14 हजार 311 लोग ऐसे थे जो पहले से एनरोल्ड थे यानी उनके नाम दो बार थे।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद यह अभियान इसलिए शुरू किया गया ताकि मतदाता सूची को 100% सटीक बनाया जा सके और फर्जी वोटिंग को रोका जा सके।

इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ की सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस कार्रवाई पर सीधा सवाल दाग दिया है। उन्होंने निर्वाचन आयोग और भाजपा के बीच कथित ‘गठबंधन’ की बात करते हुए पूछा है कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनमें कितने रोहिंग्या हैं और कितने बांग्लादेशी? बघेल ने पारदर्शिता की मांग की है और कहा है कि जनता को यह जानने का पूरा हक है कि आखिर नाम किसके कटे हैं।

दूसरी तरफ, भाजपा ने इस वार का तीखा पलटवार किया है। भाजपा प्रवक्ता विजय शंकर मिश्रा ने साफ कहा कि कांग्रेस को संविधान पर भरोसा नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि SIR एक संवैधानिक प्रक्रिया है जो कांग्रेस के राज में भी होती थी। भाजपा ने उल्टा कांग्रेस को घेरते हुए आरोप लगाया कि रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों का समर्थन तो हमेशा से कांग्रेस ही करती आई है।

अगर आप रायपुर या आसपास के इलाके में रहते हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहने की जरूरत जरूर है। चुनाव आयोग ने कहा है कि यह प्रक्रिया सूची को मजबूत बनाने के लिए है, किसी असली वोटर को हटाने के लिए नहीं। अगर आपको लगता है कि आपका नाम गलती से कट गया है, तो आपके पास अभी भी मौका है। आप 31 दिसंबर तक दावा-आपत्ति दाखिल कर सकते हैं और अपना नाम वापस जुड़वा सकते हैं।

 

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