महासमुंद

कुत्ते का नाम ‘राम’ प्रश्न से महासमुंद में भारी बवाल, जिम्मेदार कौन?

हिंदूवादी संगठनों ने इसे महज एक त्रुटि नहीं, बल्कि एक सुनियोजित अपमान माना

AINS NEWS… बुधवार को महासमुंद जिले के सरकारी स्कूलों में कक्षा चार की अंग्रेजी की परीक्षा थी। बच्चों के हाथ में जो प्रश्न पत्र आया, उसमें एक सवाल था- “मोना के कुत्ते का क्या नाम है?” (What is the name of Mona’s dog?)। सामान्य तौर पर यह एक साधारण सवाल लगता है, लेकिन विवाद इसके विकल्पों यानी ऑप्शन्स में छिपा था। इस प्रश्न के उत्तर के लिए जो विकल्प दिए गए, उनमें से एक विकल्प था- ‘राम’।

भगवान राम, जो करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं, उनका नाम कुत्ते के नाम के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाना, किसी भी समाज के लिए सहज स्वीकार्य नहीं था। जैसे ही यह प्रश्न पत्र स्कूल से बाहर आया, खबर आग की तरह फैल गई। हिंदूवादी संगठनों ने इसे महज एक त्रुटि नहीं, बल्कि एक सुनियोजित अपमान माना।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आक्रोशित संगठनों ने पटेवा में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय कुमार लहरे का घेराव किया। स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंपकर दोषियों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की।

जब हंगामा बढ़ा, तो सवाल पूछा गया कि आखिर यह प्रश्न पत्र सेट किसने किया और छापा किसने? यहाँ अधिकारियों के बयान विरोधाभासी हैं। समग्र शिक्षा की एपीसी सैम्पा बोस, जिन्हें प्रश्न पत्र सेट कराने की जिम्मेदारी दी गई थी, उनका कहना है कि उन्होंने विशेषज्ञ समिति से पेपर तैयार करवाया था। लेकिन उनका दावा है कि उन्होंने जो पीडीएफ फाइल भेजी थी, यह वह पर्चा है ही नहीं। यानी जो पेपर बच्चों को बांटा गया, वह उनकी तरफ से भेजा गया पेपर नहीं था।

वहीं दूसरी ओर, जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि विषय विशेषज्ञों से मिला पर्चा वेंडर को भेजा गया था, लेकिन जो छपकर आया और बंटा, वह उनका भेजा हुआ नहीं है। अब सवाल उठता है कि अगर शिक्षा विभाग ने यह नहीं भेजा, तो छापा किसने?

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पर प्रकाशक, कृति ऑफसेट के संचालक आदेश श्रीवास्तव का बयान आता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि उन्होंने वही छापा है, जो महासमुंद डीईओ कार्यालय से भेजा गया था।

एक सरकारी परीक्षा का पेपर छपता है, बच्चों के हाथों में पहुँचता है, उसमें एक गंभीर त्रुटि होती है, और जब जवाबदेही की बात आती है, तो एपीसी, डीईओ और प्रिंटर,,. तीनों एक-दूसरे पर उंगली उठा रहे हैं। यह सिर्फ एक टाइपिंग की गलती नहीं है, यह पूरी परीक्षा प्रणाली की निगरानी पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है। क्या प्रश्न पत्र छपने से पहले उसकी प्रूफ-रीडिंग नहीं की गई?

फिलहाल, मामले को तूल पकड़ता देख जिला शिक्षा अधिकारी ने बयान जारी किया है कि यह प्रश्न पत्र त्रुटिवश छपा था और इसे निरस्त कर दिया गया है।

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