स्वामी आत्मानंद स्कूल में अनुशासन पर सवाल, शिक्षिकाओं के वायरल वीडियो से मचा विवाद
प्रकरण पर विद्यालय प्रशासन एवं शिक्षा विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

AINS NEWS… गरियाबंद जिला मुख्यालय स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय में पदस्थ कुछ शिक्षिकाओं के दो वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वायरल वीडियो में शिक्षिकाएं विद्यालय परिसर के भीतर कैटवॉक करती दिखाई दे रही हैं, वहीं दूसरे वीडियो में विद्यालय परिसर में एक शिक्षक के दामाद का स्वागत किया जा रहा है। इन घटनाओं के सामने आने के बाद विद्यालय की गरिमा, शैक्षणिक वातावरण और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।

विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के अभिभावकों ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे शैक्षणिक मर्यादा और आचरण नियमों का उल्लंघन बताया है। अभिभावकों का कहना है कि जिस परिसर में बच्चों को अनुशासन, नैतिक मूल्यों और जिम्मेदार नागरिक बनने की शिक्षा दी जाती है, उसी परिसर में इस प्रकार की गतिविधियां होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
अभिभावकों ने चिंता जताई कि शिक्षकों का व्यवहार विद्यार्थियों के लिए आदर्श होता है। यदि शिक्षक-शिक्षिकाएं विद्यालय समय और परिसर में इस तरह की गतिविधियों में लिप्त रहेंगी, तो बच्चों के मानसिक विकास और शैक्षणिक अनुशासन पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।
कानूनी और प्रशासनिक नियमों की अनदेखी का आरोप
शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, विद्यालय सेवा आचरण नियम तथा शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) के तहत विद्यालय में सुरक्षित, अनुशासित और शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना विद्यालय प्रशासन और शिक्षकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
विद्यालय परिसर का उपयोग किसी भी प्रकार की निजी गतिविधि, मनोरंजन या गैर-शैक्षणिक कार्यक्रम के लिए करना नियमों के विपरीत माना जाता है।
अभिभावकों का आरोप है कि वायरल वीडियो प्राचार्य की अनुपस्थिति में बनाए गए, जिससे यह संकेत मिलता है कि विद्यालय में आंतरिक अनुशासन कमजोर हुआ है। वीडियो में उप-प्राचार्य की उपस्थिति भी दिखाई देने की बात कही जा रही है, जिससे प्रशासनिक जिम्मेदारी पर और सवाल खड़े हो रहे हैं।
पूर्व विवाद से जुड़ता मामला
उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व इन्हीं शिक्षिकाओं द्वारा विद्यालय की प्राचार्य के विरुद्ध मोर्चा खोले जाने की भी चर्चा रही है। प्राचार्य वर्षों से विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और अनुशासन को सख्ती से बनाए रखने के लिए जानी जाती हैं। एक अभिभावक ने आरोप लगाया कि अनुशासनात्मक नियंत्रण के कारण ही कुछ शिक्षिकाएं असंतुष्ट थीं और अब लगातार ऐसी गतिविधियां सामने आ रही हैं।
सहशिक्षा विद्यालय में विशेष सतर्कता आवश्यक
यह विद्यालय सहशिक्षा प्रणाली पर आधारित है, जहां बालक और बालिकाएं एक साथ अध्ययन करते हैं। ऐसे में शिक्षकों का आचरण, व्यवहार और सार्वजनिक गतिविधियां विद्यार्थियों पर सीधा प्रभाव डालती हैं। अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय में अनुशासन तभी तक कायम रहता है, जब तक नेतृत्व और शिक्षक स्वयं नियमों का पालन करें।
जांच की मांग
अभिभावकों और जागरूक नागरिकों ने जिला शिक्षा अधिकारी एवं संबंधित विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, वायरल वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि, तथा यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल, इस पूरे प्रकरण पर विद्यालय प्रशासन एवं शिक्षा विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।




