बिलासपुर

मुहर्रम से पहले ईरानी समाज का रक्तदान महाअभियान, 70 यूनिट रक्त संग्रह

रक्तदान सबसे बड़ा जीवनदान है और इससे किसी जरूरतमंद की जान बचाई जा सकती है

AINS NEWS बिलासपुर… मुहर्रम की शुरुआत से ठीक पहले बिलासपुर के चांटीडीह स्थित ईरानी इमामबाड़ा में इंसानियत, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल देखने को मिली। हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाते हुए ईरानी समाज द्वारा विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें युवाओं के साथ-साथ महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शिविर में करीब 70 यूनिट रक्त एकत्र किया गया।

आयोजकों ने बताया कि एकत्रित रक्त जरूरतमंद मरीजों, दुर्घटना पीड़ितों, थैलेसीमिया से ग्रसित बच्चों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के उपचार में उपयोग किया जाएगा। समाज के लोगों का मानना है कि रक्तदान सबसे बड़ा जीवनदान है और इससे किसी जरूरतमंद की जान बचाई जा सकती है।

शिविर में बड़ी संख्या में युवा पहली बार रक्तदान करने पहुंचे। वहीं समाज के कई सदस्य वर्षों से इस सेवा अभियान से जुड़े हुए हैं। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने भी यह संदेश दिया कि समाज का हर वर्ग जनहित के कार्यों में अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए आगे आ रहा है।

आयोजकों ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन का संदेश केवल किसी एक समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका जीवन त्याग, सत्य और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक है। रक्तदान शिविर के माध्यम से उसी विचारधारा को समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

इस अवसर पर मौलाना सैयद जीशान अली, समाज के अध्यक्ष दिलशेर अली, कमेटी अध्यक्ष सरताज अली, ज़हूर अली, जाकिर अली, बाबर अली, मोहसिन अली, निसार अली एवं साबर अली की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी ने लोगों से नियमित रक्तदान कर मानव सेवा के इस अभियान से जुड़ने की अपील की।

ईरानी समाज द्वारा आयोजित यह रक्तदान शिविर केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकार और इंसानियत की भावना का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि सच्ची श्रद्धांजलि वही है, जो किसी जरूरतमंद के जीवन को बचाने में सहायक बने।

 

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