लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी कड़े आदेशों के बाद अब संलग्नीकरण की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त होने जा रही
स्कूल शिक्षा मंत्री द्वारा समीक्षा बैठक में इस कुप्रथा पर गहरी नाराजगी जताई गई

AINS NEWS… छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में लंबे समय से विभिन्न कार्यालयों और गैर-शैक्षणिक कार्यों में संलग्न शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो गई है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) और कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) रायपुर द्वारा जारी कड़े आदेशों के बाद अब संलग्नीकरण की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त होने जा रही है।

जारी नए आदेश के मुताबिक, ऐसे कई शिक्षक जो अपनी मूल शालाओं को छोड़कर बीआरसी , एबीईओ, सहायक संचालक या एपीसी जैसे प्रशासनिक और कार्यालयीन पदों पर संलग्न होकर मलाईदार कुर्सियों पर जमे हुए थे, उन्हें तत्काल प्रभाव से अपनी मूल पदस्थापना वाली संस्था (शाला) के लिए कार्यमुक्त किया जाएगा।

समीक्षा बैठक में मंत्री ने दिए थे सख्त निर्देश
विभाग द्वारा जारी आधिकारिक पत्राचार (पत्र क्र./स्था.4/2026/17) के अनुसार, स्कूल शिक्षा मंत्री द्वारा आयोजित समीक्षा बैठक में इस कुप्रथा पर गहरी नाराजगी जताई गई थी। शासन ने स्पष्ट पाया है कि विभाग में कार्यरत शिक्षक एवं कर्मचारी अपनी मूल शैक्षणिक सेवाओं को छोड़कर अन्य कार्यालयों व संस्थाओं में गैर-शैक्षणिक कार्यों में संलग्न हैं। इसके परिपालन में लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को सीधे तौर पर निर्देशित किया है कि ऐसे सभी शिक्षकों को तत्काल अपनी मूल संस्था में उपस्थिति देने हेतु निर्देशित किया जाए।

शिक्षकों में हड़कंप
विभाग के इस कड़े रुख से उन रसूखदार शिक्षकों में हड़कंप मच गया है, जो राजनीतिक या प्रशासनिक पहुंच के चलते स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के बजाय जिला और विकासखंड मुख्यालयों के दफ्तरों से अपनी नौकरी चला रहे थे। दूसरी ओर, सरकार के इस फैसले का अभिभावकों और शिक्षाविदों ने पुरजोर स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि शिक्षकों का मूल काम चॉक और डस्टर संभालकर बच्चों का भविष्य संवारना है। इस कड़े कदम से प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के उन स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होगी, जहाँ संलग्नीकरण के कारण लंबे समय से पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।




