4 से 5 स्कूल जहां छात्रों की संख्या में भारी गिरावट आई, उन्हें बंद किया जा सकता है
जिन स्कूलों में कभी 1000 से ज्यादा बच्चे पढ़ते थे, आज वहां संख्या सिमटकर महज 50 रह गई

AINS NEWS… राजधानी रायपुर में संचालित अनुदान प्राप्त स्कूलों का जल्द ही बड़ा निरीक्षण यानी इंस्पेक्शन होने वाला है। डीईओ ऑफिस ने इसके लिए कमर कस ली है और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को एक पत्र भी लिख दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, शहर में ऐसे 4 से 5 स्कूल हैं जहां छात्रों की संख्या में भारी गिरावट आई है। जरा सोचिए, जिन स्कूलों में कभी 1000 से ज्यादा बच्चे पढ़ते थे, आज वहां संख्या सिमटकर महज 50 रह गई है।

शासन का आदेश आते ही इन स्कूलों का निरीक्षण किया जाएगा और जिन स्कूलों में तय मानकों से कम बच्चे मिलेंगे, उन पर सख्त कार्यवाही होगी, यानी उन्हें बंद भी किया जा सकता है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो रायपुर में पहले 37 अनुदान प्राप्त स्कूल थे, लेकिन अब केवल 35 ही संचालित हैं। हाल ही में दो स्कूलों…बैजनाथ पारा स्थित स्कूल और सकरी प्राथमिक शाला को बंद कर दिया गया क्योंकि वहां बच्चे ही नहीं बचे थे। इन बंद हुए स्कूलों के बच्चों को आस-पास के सरकारी स्कूलों में शिफ्ट किया गया।
लेकिन सभी स्कूलों का हाल बुरा नहीं है। कालीबाड़ी स्कूल, गुजराती स्कूल, महावीर, राष्ट्रीय और खालसा स्कूल जैसे संस्थान आज भी बेहतर स्थिति में हैं और वहां छात्रों की संख्या अच्छी है। लेकिन संकट उन स्कूलों पर है जो सरकारी मदद तो ले रहे हैं, लेकिन बच्चे नदारद हैं।
सरकार का नियम क्या कहता है?
अनुदान प्राप्त स्कूलों में प्राथमिक स्तर पर कम से कम 50, मिडिल में 150 और हाई स्कूल में 250 छात्र-छात्राएं होना अनिवार्य है। अगर संख्या इससे कम है, तो स्कूल चलाने का औचित्य खत्म हो जाता है, क्योंकि वहां शिक्षकों को सैलरी सरकारी मानदेय से ही मिलती है।
शहर के दो प्रमुख स्कूल सालेम स्कूल (गर्ल्स) और सेंट पॉल स्कूल (बॉयज)। ये दोनों स्कूल आस-पास ही हैं और एक ही समिति द्वारा चलाए जाते हैं। थोड़ी ही दूर पर स्थित प्रो. जेएन पांडेय स्कूल में बच्चों की भरमार है, लेकिन सालेम और सेंट पॉल में संख्या लगातार गिर रही है। जानकारों और विभाग की मानें तो दो विकल्प हो सकते हैं…या तो इन्हें बंद करके बच्चों को सरकारी स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा, या फिर इन दोनों स्कूलों का Merger कर दिया जाएगा।
यह स्थिति चिंताजनक है। क्या यह शिक्षा की गुणवत्ता में कमी है या फिर निजी स्कूलों की तरफ बढ़ता रुझान? सरकार जल्द ही इस पर फैसला लेने वाली है। जैसे ही निरीक्षण शुरू होगा, इन ऐतिहासिक स्कूलों के भविष्य का फैसला हो जाएगा।




