छत्तीसगढ़राजनीति

कांग्रेस जिसे उम्मीदवार बनाएगी उसके लिए हम सबको ईमानदारी और कर्मठता के साथ काम करना होगा – कु.शैलजा

अविभाजित मध्य प्रदेश के दौरान हमने इस बात को करीब से देखा है। यहां से जो संदेश प्रसारित होता था छत्तीसगढ़ की राजनीति में प्रभावी बन जाता था

AINS NEWS….अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव व प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने पदाधिकारियों में उत्साह का संचार करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव के लिए टिकट की दावेदारी करने का हक सभी को है। आप अपनी ताकत लगाएं, जीत के दावों का पुख्ता समीकरण भी बताएं। कांग्रेस जिसे उम्मीदवार बनाएगी उसके लिए हम सबको ईमानदारी और कर्मठता के साथ काम करना होगा। पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार को विजय बनाकर विधानसभा पहुंचाने हम सबकी जिम्मेदारी होगी। पीसीसी प्रभारी ने पदाधिकारियों और दावेदारों में उत्साह भरा और शपथ भी दिलाई।

बुधवार को सिम्स के आडिटोरियम में बिलासपुर संभाग के संभागीय सम्मेलन में संभाग के सभी जिलों से पदाधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। आडिटोरियम पदाधिकारियों से खचाखच भरा हुआ था। पीसीसी प्रभारी शैलजा ने पदाधिकारियों को अपने अंदाज में उत्साह भी बढ़ाया। पदाधिकारियों को रिचार्ज करने के साथ ही पार्टी अनुशासन की बात भी प्रमुखता के साथ कही। उनका कहना था कि चुनाव लडऩे के इच्छुक हैं तो दावेदारी करिए। जमकर करिए। जिस सीट से टिकट मांग रहे हैं उसकी पूरी-पूरी जानकारी होनी भी चाहिए। जातिगत आधार से लेकर सामाजिक परिस्थिति, बीते विधानसभा और लोकसभा चुनाव में पार्टी अगर जीती तो जीत का आधार और अगर पराजित हुई तो कारण को भी स्पष्ट करना होगा। उन्होंने साफ कहा कि विधानसभा सीट के बारे में वृहद जानकारी होना जरूरी है। हवा-हवाई और आधारहीन तरीके से टिकट की दावेदारी उचित नहीं है।

पीसीसी प्रभारी ने आडिटोरियम में उपस्थित पदाधिकारियों से संकल्प भी लिया। पदाधिकारियों ने शपथ ली कि टिकट किसी को ही मिलेगा। जिसे टिकट मिलेगा उसके लिए काम करेंगे। उम्मीदवार के विरोध में नहीं जाएंगे। शैलजा के इस प्रस्ताव को पदाधिकारियों ने सहजता के साथ स्वीकारा और शपथ भी ली। शपथ दिलाने के बाद शैलजा ने दावा किया कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस दमदारी के साथ सत्ता में बनी रहेगी। इस बार 75 प्लस सीट के साथ हम सरकार में काबिज रहेंगे।

पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए सीएम बघेल ने कहा कि बिलासपुर राजनीति का गढ़ रहा है। अविभाजित मध्य प्रदेश के दौरान हमने इस बात को करीब से देखा है। यहां से जो संदेश प्रसारित होता था छत्तीसगढ़ की राजनीति में प्रभावी बन जाता था। राजनीति के साथ ही साथ ही बिलासपुर कांग्रेस का गढ़ रहा है। राज्य निर्माण के बाद कांग्रेस की सरकार भी बनी। अफसोस इस बात का कि छत्तीसगढ़ गठन के बाद हुए पहले विधानसभा चुनाव में हम सत्ता से बाहर हो गए। यह हार का सिलसिला वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव तक चलते रहा। जब वे अपनी बात रख रहे थे तब इस बात को लेकर नाराजगी और तल्खी दोनों नजर आई। उन्होंने साफ कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी जब तक कांग्रेस में रहे छत्तीसगढ़ में सरकार से बाहर रहे। जब जोगी जी कांग्रेस से बाहर चले गए हमारी सत्ता में वापसी हो गई। राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा करते हुए कहा कि वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में अजीत जोगी कांग्रेस से अलग हो गए और नई पार्टी बना ली।
विधानसभा चुनाव में उन्होंने बसपा के साथ गठबंधन कर लिया। इसके कारण बिलासपुर संभाग की अधिकांश सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बनी।

 

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