विधानसभा सत्र के पहले दिन के बहिष्कार का ऐलान कर दिया कांग्रेस ने
आखिर क्यों कांग्रेस 'विजन 2047' जैसे मुद्दे पर चर्चा से भाग रही है - भाजपा

AINS NEWS… रायपुर में शीतकालीन सत्र की शुरुआत बेहद हंगामेदार होने के आसार हैं, 14 दिसंबर से शुरू होने वाले सत्र के पहले दिन को सरकार ‘विजन 2047’ यानी विकसित छत्तीसगढ़ के रोडमैप पर चर्चा के लिए समर्पित करना चाहती है. लेकिन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह पहले दिन सदन में कदम भी नहीं रखेगी.

रायपुर के राजीव भवन में कांग्रेस विधायक दल की एक अहम बैठक हुई. इस बैठक की अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने की, जिसमें पीसीसी चीफ दीपक बैज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पार्टी के तमाम विधायक मौजूद रहे. बैठक के बाद जो फैसला आया, उसने सबको चौंका दिया. कांग्रेस ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया कि वे विजन 2047 पर होने वाली चर्चा का बहिष्कार करेंगे.
अब सवाल उठता है कि आखिर कांग्रेस को विजन 2047 से दिक्कत क्या है? कांग्रेस का तर्क बहुत सीधा और तीखा है. नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने सरकार पर करारा हमला बोलते हुए कहा है कि यह ‘अमृतकाल’ नहीं बल्कि ‘भ्रमितकाल’ है. विपक्ष का कहना है कि सरकार जनता को दूरबीन से भविष्य के सुनहरे सपने दिखा रही है, जबकि आज प्रदेश का किसान, नौजवान और महिलाएं परेशान हैं.

कांग्रेस का आरोप है कि सत्र के पहले दिन सरकार को किसानों के बकाया भुगतान, बढ़ती बेरोजगारी, महिला सुरक्षा और महंगाई जैसे ज्वलंत मुद्दों पर बात करनी चाहिए थी. लेकिन सरकार इन ‘मूल सवालों’ से बचने के लिए 2047 का झुनझुना लेकर आई है. कांग्रेस का मानना है कि जब जनता आज की तकलीफों से जूझ रही है, तब 25 साल बाद के कल्पित एजेंडे पर चर्चा करना समय की बर्बादी है और जनता के साथ धोखा है. इसलिए, विरोध जताने के लिए पहले दिन विपक्ष की सीटें खाली रहेंगी.
उधर, कांग्रेस के इस बहिष्कार वाले दांव पर सरकार भी चुप नहीं बैठी है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विपक्ष के इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कांग्रेस के बहिष्कार को ‘निराशा’ का प्रतीक बताया है. सीएम साय का कहना है कि कांग्रेस अब पूरी तरह से मुद्दा-विहीन हो चुकी है. उनके पास सरकार को घेरने के लिए न तो कोई तथ्य हैं और न ही कोई तर्क, इसलिए वे चर्चा से भाग रहे हैं.

मुख्यमंत्री ने तो यहाँ तक कह दिया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने जो ‘पाप’ किए थे, भाजपा सरकार अब उन्हें सुधारने का काम कर रही है. भाजपा का कहना है कि विपक्ष चर्चा से डर रहा है क्योंकि वे जानते हैं कि विकास के मुद्दे पर उनके पास बोलने के लिए कुछ नहीं है. विजन 2047 प्रदेश की तरक्की का खाका है, और इसका विरोध करना यह दर्शाता है कि कांग्रेस राज्य के विकास में भागीदार नहीं बनना चाहती.
यह टकराव सिर्फ एक दिन के बहिष्कार तक सीमित नहीं रहने वाला. कांग्रेस ने अपनी रणनीति साफ़ कर दी है. वे भाजपा सरकार के एक साल के कार्यकाल की समीक्षा के लिए एक ‘डौजियर’ तैयार कर रहे हैं, यानी सरकार की नाकामियों का कच्चा चिट्ठा. आने वाले दिनों में जमीन अधिग्रहण, बिजली बिल और महंगाई को लेकर सड़क से लेकर सदन तक बड़े धरने और प्रदर्शन की योजना बनाई गई है.
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ का यह शीतकालीन सत्र काफी गर्म रहने वाला है. एक तरफ सरकार है जो 2047 का विजन लेकर चल रही है, और दूसरी तरफ विपक्ष है जो आज के मुद्दों पर अड़ा हुआ है. अब देखना यह होगा कि इस बहिष्कार का जनता पर क्या असर पड़ता है. क्या कांग्रेस का यह दांव सरकार को बैकफुट पर ला पाएगा, या फिर भाजपा इसे विपक्ष की हताशा साबित करने में सफल होगी?




