छत्तीसगढ़

सुप्रीम कोर्ट ने शराब घोटाले में कवासी लखमा समेत अन्य आरोपियों को अंतरिम जमानत दे दी, राहत के साथ सख्त टिप्पणियां भी  

आरोप है कि कवासी लखमा को कमीशन के तौर पर 64 करोड़ रुपए मिले

AINS NEWS… चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाए, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इन याचिकाओं पर विस्तृत विचार मुख्य मामलों की सुनवाई के साथ ही किया जाएगा।

राज्य सरकार की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने इस जल्द सुनवाई और जमानत का कड़ा विरोध किया। जेठमलानी ने अपनी दलील में कहा कि जांच अभी जारी है और यह कोई साधारण मामला नहीं है। उनका तर्क था कि इसमें मंत्रियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और बड़े सरकारी अफसरों की मिलीभगत है, जिन्होंने मिलकर जनता के पैसे, यानी ‘पब्लिक मनी’ का दुरुपयोग किया है।

आरोप है कि कवासी लखमा को कमीशन के तौर पर 64 करोड़ रुपए मिले।  आरोप है कि इसमें से 4.6 करोड़ रुपए पार्टी की गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हुए, जबकि लगभग 10 करोड़ रुपए निजी संपत्ति बनाने में खर्च किए गए। इसमें लखमा और उनके बेटे के घर शामिल बताए जा रहे हैं।

कवासी लखमा की ओर से देश के दिग्गज वकील मुकुल रोहतगी ने मोर्चा संभाला। रोहतगी ने दलील दी कि कई आरोपी पहले से ही जमानत पर बाहर हैं। उन्होंने जांच की गति पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में 1,100 से ज्यादा गवाहों से पूछताछ हो चुकी है और छह चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं। उनका कहना था कि कार्यवाही के इस चरण में आरोपियों को लगातार हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं बनता।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अंतरिम जमानत तो दे दी, लेकिन आरोपों की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया। पीठ ने माना कि कुछ अधिकारियों और नेताओं के खिलाफ आरोप बहुत गंभीर हैं और इसमें उच्चतम स्तर पर मिलीभगत की बात कही जा रही है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि जब मुख्य मामले की सुनवाई होगी, तब इन सभी पहलुओं की गहराई से, यानी व्यापक रूप से जांच की जाएगी।

 

Related Articles

Back to top button